

नर्मदापुरम / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा नर्मदापुरम में शिवाजी बस्ती तथा रामदास एवं गुरुनानक बस्ती में पथ संचलन का आयोजन किया गया। घोष की धुन पर अनुशासित पंक्तियों में निकले गणवेशधारी स्वयंसेवकों का बस्तीवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भारत माता के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। पथ संचलन के माध्यम से अनुशासन, सामाजिक समरसता, एकता और राष्ट्रभाव का संदेश दिया गया।
हिंदुत्व हमारा राष्ट्रीय तत्व, समाज में एकता और अपनत्व आवश्यक – संतोष व्यास……
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता संस्कृत भारती विभाग एवं जिला प्रज्ञा प्रवाह के प्रज्ञा श्री संतोष व्यास ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुत्व हमारा राष्ट्रीय तत्व है। हमें समाज में एकता, अपनत्व, संस्कार और सहयोग की भावना को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। संघ की कार्यपद्धति ‘मैं’ से ‘हम’ की भावना विकसित करने वाली है। समूह में कार्य करना संघ के हृदय का भाव है।
उन्होंने कहा कि समाज में निश्छल प्रेम, सेवा, चरित्र निर्माण तथा एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनने की भावना आवश्यक है। शरीर, मन और बुद्धि के समन्वय के साथ सकारात्मक विचारों का संचार होना चाहिए। जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता और एकता के लिए कार्य करना समय की आवश्यकता है। जीवन में अच्छे संस्कार, चरित्र की शुद्धता और समाज के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए।
संतोष व्यास ने विभिन्न प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक एकता एवं सहयोग का महत्व समझाया। बच्चों के गुब्बारों की कहानी के माध्यम से उन्होंने दूसरों की चिंता करने और उनके सुख-दुःख में सहभागी बनने को सच्चे सहयोग का भाव बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पद, प्रतिष्ठा, पूजा, पैसा और पुरस्कार जैसे पांच ‘प’ की चाह से ऊपर उठकर समाजहित में कार्य करना चाहिए।
राजा चोल से संबंधित प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता, संपत्ति और सफलता से व्यक्ति में अहंकार आने की आशंका रहती है। इसलिए जीवन में विनम्रता और सेवा का भाव बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक अक्षुण्णता का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद भारत की संस्कृति और सभ्यतागत चेतना निरंतर बनी रही है।
सनातन संस्कृति आदि-अनंत, राष्ट्रकार्य में समर्पित हैं संघ के स्वयंसेवक – राजकुमार
रामदास बस्ती के पथ संचलन में नन्द किशोर यादव वरिष्ठ समाज सेवी एवं शिवाजी बस्ती के पथ संचलन के अवसर पर नगर कार्यवाह विकेश राजपूत एवं मुख्य वक्ता जिला सद्भावना कार्य प्रमुख राजकुमार उपस्थित रहे।
राजकुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति की महत्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य तथा राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा भारत की सांस्कृतिक पहचान है। यह आदि-अनंत है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होती रही है।
उन्होंने पृथ्वीराज चौहान एवं मोहम्मद गोरी के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए इतिहास से सीख लेने की बात कही। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ऐसे युवाओं की कल्पना करते थे, जो उनके आदर्शों के अनुरूप राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित हों। आज संघ के माध्यम से हजारों स्वयंसेवक राष्ट्रकार्य में लगे हुए हैं तथा देश को परम वैभव तक पहुंचाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने संघ और समाज को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रहित में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही पंच परिवर्तन के विषय पर प्रकाश डालते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने भाषा, भेष, भजन, भोजन और भ्रमण जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं सामाजिक जीवन में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखे।
प्रमुख मार्गों से निकला पथ संचलन, जगह-जगह हुआ स्वागत…..
शिवाजी बस्ती का पथ संचलन नर्मदा नदी के दक्षिण तट स्थित विवेकानंद घाट से घोष की धुन के साथ प्रारंभ हुआ। इसके बाद स्वयंसेवक बस्ती के विभिन्न मार्गों से निकले। वहीं, रामदास एवं गुरुनानक बस्ती का पथ संचलन पीएमश्री शासकीय हाई स्कूल प्रांगण से प्रारंभ होकर दोनों बस्तियों के प्रमुख मार्गों से गुजरा।
दोनों क्षेत्रों में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। भारत माता के जयघोष से वातावरण राष्ट्रभाव से ओतप्रोत हो उठा। दोनों पथ संचलनों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक संघ की गणवेश में शामिल हुए।
पथ संचलन के माध्यम से स्वयंसेवकों ने अनुशासन, सामाजिक समरसता, सामूहिकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का संदेश दिया।

