
नर्मदापुरम / जनजातीय कार्य विभाग नर्मदापुरम में 93,110 रुपये के लंबित भुगतान का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद भुगतान नहीं होने से मामला चर्चा में है। इस प्रकरण में वर्तमान सहायक आयुक्त और संबंधित कार्य कराने वाले तत्कालीन हॉस्टल अधीक्षक के बयानों में अंतर सामने आया है। एक ओर विभाग का कहना है कि कार्य कराने के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ, वहीं दूसरी ओर तत्कालीन हॉस्टल अधीक्षक का दावा है कि उन्हें मौखिक निर्देश दिए गए थे और कार्य का भौतिक सत्यापन भी कराया गया था।
प्राप्त शिकायत विवरण के अनुसार, विक्रम सिंह सोलंकी 31 मई 2024 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। शिकायत में उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम के आनंद नगर स्थित शासकीय सीनियर अनुसूचित जाति बालक छात्रावास में उनके द्वारा पुताई एवं पेंटिंग का कार्य कराया गया था। इस कार्य के छह देयकों की कुल राशि 93,110 रुपये बताई गई है, जिसका भुगतान अब तक नहीं होने की शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, भुगतान के लिए कई बार आवेदन और पत्राचार किया गया। उनका कहना है कि कार्य का विभागीय स्तर पर भौतिक सत्यापन भी कराया गया था, इसके बावजूद भुगतान लंबित है।
इस मामले में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग नर्मदापुरम विवेक नागवंशी का कहना है कि विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संबंधित कार्य बिना लिखित आदेश के कराया गया था। उनके अनुसार, कार्यालय में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक तत्कालीन सहायक आयुक्त द्वारा उक्त कार्य कराने के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था।
विभाग के इस पक्ष के अनुसार, कार्य के लिए विधिवत लिखित आदेश नहीं होने का मामला भुगतान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। हालांकि, लंबित देयकों के संबंध में विभागीय अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
वहीं, विक्रम सिंह सोलंकी, जो संबंधित अवधि में तत्कालीन हॉस्टल अधीक्षक रहे हैं, का कहना है कि उन्हें तत्कालीन सहायक आयुक्त द्वारा मौखिक रूप से कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे। उनका दावा है कि कार्य पूरा होने के बाद तत्कालीन सहायक आयुक्त द्वारा कार्य का भौतिक सत्यापन भी कराया गया था।
सोलंकी के अनुसार, भौतिक सत्यापन से संबंधित दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि जब कार्य कराया गया और उसका सत्यापन भी हुआ, तो अब तक भुगतान क्यों लंबित है, इसकी जांच की जानी चाहिए।
इस प्रकार, मामले में विभाग की ओर से लिखित आदेश नहीं होने की बात कही जा रही है, जबकि शिकायतकर्ता कार्य के लिए मौखिक निर्देश मिलने और भौतिक सत्यापन होने का दावा कर रहे हैं। इन दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि संबंधित आदेश-पत्रों, सत्यापन रिपोर्ट, कार्य से जुड़े अभिलेखों और देयकों की जांच से की जा सकती है।
दस्तावेजों के अनुसार, विक्रम सिंह सोलंकी ने 9 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 40480851 दर्ज कराई थी। शिकायत जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित है। शिकायत में लंबित 93,110 रुपये का भुगतान कराने, मामले की उच्चस्तरीय जांच करने तथा जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत की स्थिति संबंधी विवरण में 10 सितंबर 2026 को शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए भेजे जाने और निर्माण शाखा प्रभारी को निराकरण दर्ज करने के लिए निर्देशित किए जाने का उल्लेख है। 25 सितंबर को शिकायतकर्ता ने फिर से राशि का शीघ्र भुगतान कराने और जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 की प्रविष्टियों में शिकायत के एल-2 अधिकारी के स्तर पर होने तथा निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने के कारण अधिकारी के स्तर में परिवर्तन किए जाने का उल्लेख मिलता है। उपलब्ध शिकायत विवरण में अंतिम भुगतान या शिकायत के पूर्ण निराकरण की पुष्टि नहीं होती है।
अब इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि यदि कार्य कराया गया था, तो उससे संबंधित भौतिक सत्यापन के दस्तावेजों और छह देयकों की विभागीय स्तर पर क्या स्थिति है। क्या संबंधित कार्य के लिए मौखिक निर्देश दिए गए थे? क्या कार्य का सत्यापन सक्षम अधिकारी ने कराया था? और क्या नियमानुसार भुगतान की पात्रता बनती है?
इन सवालों का उत्तर विभागीय रिकॉर्ड, सत्यापन दस्तावेजों, देयकों और संबंधित अधिकारियों के अभिलेखों की जांच से सामने आ सकता है। मामले में दोनों पक्षों के बयानों में अंतर को देखते हुए निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो और नियमानुसार निर्णय लिया जा सके।
फिलहाल, विक्रम सिंह सोलंकी के 93,110 रुपये के भुगतान का मामला और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के अंतिम निराकरण की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

