

नर्मदापुरम / बुधनी / जिला सीहोर निवासी 45 वर्षीय अंकुर श्रीवास्तव के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश दिया। गहरे दुःख के बीच उठाए गए इस कदम से कॉर्निया संबंधी दृष्टिहीनता से जूझ रहे लोगों को दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी है।
अंकुर श्रीवास्तव का निधन नर्मदापुरम स्थित न्यू पांडेय हॉस्पिटल में उपचार के दौरान हुआ। उनकी माता पुष्पा श्रीवास्तव ने पुत्र के नेत्रदान के लिए लिखित सहमति प्रदान की।
नेत्रदान का यह कार्य किरण फाउंडेशन, BMHRAC हॉस्पिटल की टीम और नर्मदापुरम के शासकीय अस्पताल की डॉ. ऋचा गौर की टीम के सहयोग से संपन्न हुआ। इसे संभव बनाने में मनीष वाजपई के विशेष प्रयास रहे, जबकि विनय यादव ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में योगदान दिया।
परिवार के इस परोपकारी निर्णय के प्रति आदर व्यक्त करते हुए लायंस क्लब नर्मदापुरम आयुष की ओर से अध्यक्ष डॉ. गक्खर, शाहिद खान एवं मनीष गुप्ता ने परिजनों का सम्मान किया।
नेत्रदान का सामाजिक महत्व……
दान किए गए नेत्रों से प्राप्त कॉर्निया का प्रत्यारोपण, चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होने पर, कॉर्निया की खराबी के कारण दृष्टि खो चुके लोगों को देखने का अवसर दे सकता है। इससे उनकी शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। हालांकि नेत्रदान से हर प्रकार की दृष्टिहीनता का उपचार संभव नहीं होता, लेकिन उपयुक्त मरीजों के लिए यह जीवन बदलने वाला उपहार है।
श्रीवास्तव परिवार की यह पहल समाज को नेत्रदान के प्रति जागरूक होने और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की प्रेरणा देती है। परिवार में पहले से इस विषय पर चर्चा और मृत्यु के बाद शीघ्र अधिकृत नेत्र बैंक या अस्पताल से संपर्क किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

