नर्मदापुरम / उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार 5 से 10 अक्टूबर 2026 तक अखिल भारतीय शिक्षा समागम सप्ताह के अंतर्गत शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय नर्मदापुरम में विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी-2020) शिक्षा से विकसित भारत 2047 के अंतर्गत शुक्रवार दिनांक 9 अक्टूबर 2026 को ’’भारत में शिक्षा का भविष्य’’ विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन प्राचार्य डॉ. भारती दुबे के निर्देशन में किया गया। पैनल चर्चा का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. भारती दुबे द्वारा किया गया, उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय शिक्षा नीति की संरचना, प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं तकनीकी के बारे में बताया तथा विद्यार्थियों को अधिक से अधिक प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके पश्चात डॉक्टर चंद्रशेखर राज द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आवश्यकता के बारे में बताया । उन्होंने त्रिभाषा की आवश्यकता, मातृभाषा में बुनियादी शिक्षा तथा वर्तमान में विद्यार्थियों के पास इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म जैसे ई-विद्या, ई-पाठशाला एवं स्वयं पोर्टल के बारे में विद्यार्थियों को बताया।
इसके पश्चात डॉ दुर्गेश तेली द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विकास 1968,1986 एवं 2020 के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वर्तमान समय की आवश्यकताओं पर आधारित है जिसमें विद्यार्थियों को नैतिकता, कौशल आधारित शिक्षा प्रदान किया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के स्तंभ के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफल बनाने के लिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति सेल महाविद्यालय स्तर एवं जिला स्तर पर होना चाहिए जो समय-समय पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सुधार हेतु अपने प्रयास करते रहे तथा अनुसंधान, उद्यमिता, नवाचार पर ध्यान आकर्षण की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जी. सी पांडे, राष्ट्रीय सेवा योजना जिला संगठक डॉ. हर्षा चचाने, कार्यक्रम संयोजक डॉ. रागिनी सिकरवार, आयोजन समिति के संयोजक प्रो. आर के चौकीकर, डॉ. सी एस राज, डॉ. संगीता पारे, राहुल चैहान, अजय तिवारी, डॉ. रफीक अली, सौरव सिंह, डॉ. योगेश यादव एवं अन्य स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
छात्राओं ने पैनल परिचर्चा में सहभागिता की तथा अपने प्रश्नों को रखा जिसे पैनल चर्चा में शामिल किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. आर. के चौकीकर द्वारा किया गया एवं आभार डॉ. संगीता पारे द्वारा किया गया।

