
नर्मदापुरम / इटारसी के शिक्षक सुधांशु शर्मा का शोध पत्र हाल ही में 27वें डीएई बीआरएस नेशनल लेजर सिम्पोजियम एनएलएस – 2 में प्रकाशित हुआ है। यह कार्य राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र इंदौर के लेजर विकास एवं औद्योगिक अनुप्रयोग प्रभाग के सीपी सिंह, पीके मुखोपाध्याय और केएस बिंद्रा के मार्गदर्शन में किया गया है। यह कार्य उन्होंने डीएविवि में एमटेक के दौरान किया था। यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। यह कार्य उच्च स्तरीय लेजर शोध कार्य की दिशा में बहुत अहम माना जा रहा है।
इटारसी के एक निजी विद्यालय में भौतिकी के शिक्षक सुधांशु शर्मा के अनुसार कुछ लेजर ऐसे होते हैं, जिनकी आवृत्ति बेहद शुद्ध और स्थिर होता है। इन्हें नेरो लाइनबिड्थ कहा जाता है। उन्होंने दो चरणों वाला फाइबर एम्प्लीफायर तैयार किया। फिर 1064 नैनोमीटर पर काम करने वाले सिंगल फ्रीक्वेंसी सीड लेजर से 10 मिलीवाट शक्ति ली। पहले चरण में इसे बढ़ाकर 60मिलीवाट किया गया। जबकि दूसरे चरण में 2.5 मीटर लंबे फाइबर की मदद से शक्ति केा 2 वाट तक पहुंचा दिया। यानी इससे करीब 200 गुना अधिक शक्ति की वृद्धि हो गई। दूसरे चरण में 50 प्रतिषत से अधिक स्लोप एफिषशियेंसी प्राप्त हुई।
यह रहा विशेष
इस शोध कार्य में सबसे अहम बात यह रही कि शक्ति बढ़ाने के बावजूद लेजर की लाइन बिड्थ 1 मेगाहाट्र्स ही बनी रही। इसकी जांच प्रयोगशाला में तकनीकी रूप से जांची गई। इसके करीब 2 किलोमीटर फाइबर का प्रयोग किया गया। इस जांच में एसबीएस का कोई संकेत नहीं मिला और न ही एएसएफ का संकेत प्राप्त हुआ।
यह होगा लाभ…
शोधकर्ता के अनुसार आगे चलकर उच्च शक्ति वाले स्टाॅक लेजर स्रोत बनाने में यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। इसकी आवश्यकता वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत तकनीकी अनुप्रयोगों में पड़ती है। ज्ञात रहे कि सुधांशु ने इलेक्टानिक्स एवं कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक और लेजर साइंस एंड एप्लीकेशन से एम टेक किया है।

