
नर्मदापुरम / जिले में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं और अवैध गतिविधियों के चलते स्थानीय थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। नर्मदापुरम कोतवाली, देहात, पिपरिया, बावई और सोहागपुर थाना क्षेत्रों में चोरी व अन्य अपराधों और बेखौफ जारी अवैध शराब कारोबार को लेकर आम जनता में रोष है। इन इलाकों में पुलिस की जमीनी पकड़ और प्रभावी कार्रवाई की सुस्ती अब चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है।
चोरी की वारदातों में इजाफा, ढाबों पर सज रही अवैध शराब की महफिल….
देहात थाना क्षेत्र सहित जिले के कई ग्रामीण व बाहरी इलाकों में चोरी की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर स्थित ढाबों और बाहरी क्षेत्रों में अवैध शराब का नेटवर्क खुलेआम सक्रिय बताया जा रहा है। शिकायतों के बावजूद शराब माफिया पर कोई ठोस व स्थायी कार्रवाई न होने से पुलिस की निष्ठा और निगरानी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि लगातार सामने आ रही इन गतिविधियों पर रोक लगाने में स्थानीय अमला नाकाम क्यों साबित हो रहा है ? रात्रि गश्त और लंबित मामलों की समीक्षा की जरूरत अपराध नियंत्रण और आमजन को भयमुक्त माहौल देना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जिले में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा प्रत्येक थाने की गहन समीक्षा किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।
इसके तहत: अनसुलझे और लंबितआपराधिक मामलों का प्राथमिकता से निपटारा।
रात्रि गश्त और बीट स्तर की गश्ती व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाना। ढाबों और संदिग्ध ठिकानों पर नियमित आकस्मिक चेकिंग। अवैध शराब के मुख्य सरगनाओं पर स्थायी और कठोर कार्रवाई।
प्रशासनिक फेरबदल की संभावना पर टिकी निगाहें….
लगातार कमजोर साबित हो रही व्यवस्था के बीच अब यह मांग भी उठ रही है कि जिन थाना क्षेत्रों में आपराधिक और अवैध गतिविधियां नहीं थम रही हैं, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया जाए। थानों की कमान में प्रशासनिक फेरबदल से कार्यप्रणाली में कसावट आ सकती है। अब जिले की निगाहें पुलिस अधीक्षक के अगले कदमों पर टिकी हैं कि वे कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए क्या सख्त फैसले लेते हैं।

