
नर्मदापुरम / इटारसी में विभिन्न स्थानों पर खुले एवं असुरक्षित नालों के कारण लगातार हो रही दुर्घटनाओं तथा हाल ही में सामने आई जनहानि की घटना को लेकर अधिवक्ता सिद्धार्थ आर्य ने स्थानीय युवाओं एवं नागरिकों के साथ एसडीएम इटारसी के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष जांच, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, खुले नालों पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था तथा जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों, एजेंसी एवं ठेकेदार की जवाबदेही तय कर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि इटारसी के कई प्रमुख बाजारों, आवासीय क्षेत्रों एवं सार्वजनिक मार्गों पर बड़े और गहरे नाले लंबे समय से खुले तथा असुरक्षित अवस्था में हैं। इससे राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों एवं वाहन चालकों के लिए लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इस समस्या की ओर पूर्व में भी नगर पालिका का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन कई स्थानों पर अब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
ज्ञापन में न्यास कॉलोनी, MGM कॉलेज के आसपास, LIC कार्यालय क्षेत्र, गरीबी लाइन सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में खुले नालों की स्थिति का उल्लेख किया गया। पूर्व में गरीबी लाइन स्थित हनुमान मंदिर के पास एक बालिका के नाले में गिरने, 28 नंबर क्षेत्र में एक कार के खुले नाले में गिरने तथा LIC कार्यालय के समीप एक व्यक्ति के नाले में गिरने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। हाल ही में खुले नाले से संबंधित एक घटना में एक व्यक्ति के नाले में पाए जाने एवं उसकी मृत्यु की खबर सामने आने के बाद मामले को गंभीर जनसुरक्षा का विषय बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि 24 घंटे के भीतर शहर के सभी अत्यधिक जोखिम वाले खुले नालों पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर तथा आवश्यकता अनुसार मजबूत पटिया/स्टील प्लेट अथवा अन्य सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि कोई अन्य दुर्घटना न हो।
इसके साथ ही नगर पालिका द्वारा खुले नालों को ढंकने के लिए की गई लगभग ₹24 लाख की निविदा/कार्यादेश प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है। इसमें निविदा कब जारी हुई, संबंधित एजेंसी/ठेकेदार कौन है, कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा क्या थी, अब तक कितना भुगतान हुआ, कार्य बीच में क्यों रुका तथा निगरानी के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार थे—इन सभी बिंदुओं की जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि तीन दिवस के भीतर संबंधित ठेकेदार/एजेंसी को निर्देश देकर खुले नालों को स्थायी रूप से सुरक्षित करने का कार्य पुनः प्रारंभ कराया जाए और कार्य पूर्ण करने की निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक की जाए। साथ ही हाल की मृत्यु एवं पूर्व में हुई दुर्घटनाओं की निष्पक्ष प्रशासनिक एवं तकनीकी जांच कर जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, एजेंसी अथवा ठेकेदार के विरुद्ध विभागीय एवं नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अधिवक्ता सिद्धार्थ आर्य ने मांग की कि मृतक के परिजनों को नियमानुसार उचित आर्थिक मुआवजा/अनुग्रह सहायता प्रदान की जाए तथा ऐसी घटनाओं में घायल व्यक्तियों के मामलों में भी नियमानुसार सहायता सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि ज्ञापन प्राप्त होने के बाद 24 घंटे के भीतर अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती तथा तीन दिवस के भीतर स्थायी रूप से नालों को सुरक्षित करने का कार्य प्रारंभ नहीं कराया जाता, तो प्रशासन को पूर्व सूचना एवं आवश्यक अनुमति के साथ पटेल चौक, इटारसी अथवा प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
अधिवक्ता सिद्धार्थ आर्य ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करना नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।

