
नर्मदापुरम / भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के साथ ही शनिवार से पितृपक्ष (महालय पर्व) का विधिवत आरंभ हो गया है। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए सुबह 6 बजे से ही नर्मदापुरम के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी। नगर के ऐतिहासिक सेठानी घाट, चित्रगुप्त घाट, विवेकानंद घाट और मंगलवारा घाट पर दिनभर पितृ तर्पण और पिंडदान का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं ने नर्मदा के पावन जल में खड़े होकर हाथ में कुश और काले तिल धारण कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपने पितरों को जलांजलि अर्पित की। घाटों पर उपस्थित विद्वान ब्राह्मणों ने शास्त्रोंक्त विधि-विधान से पूजन और श्राद्ध प्रक्रिया संपन्न कराई। परिजनों ने अपने पूर्वजों की आत्मशांति और परिवार के कल्याण के लिए उनसे आशीर्वाद की कामना की। ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील चौरे के अनुसार, पितृपक्ष पूर्वजों के स्मरण और उनकी तृप्ति का सबसे पुण्यकारी समय माना जाता है। इस अवधि में पूर्णिमा श्राद्ध और नांदी मातृ महाश्राद्ध की विशेष महत्ता है। उन्होंने उल्लेख किया कि पितृपक्ष के दौरान ‘भरणी श्राद्ध’ करने से तीर्थराज गया में किए गए श्राद्ध के समान अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त, मोक्षदायिनी नर्मदा के तट पर किया गया तर्पण अत्यंत फलदायी माना गया है।
यह 16 दिवसीय महालय पर्व 10 अक्टूबर को सर्वपितृ विसर्जन अमावस्या के साथ संपन्न होगा। तब तक प्रतिदिन सुबह नर्मदा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु अपने-अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और तर्पण अनुष्ठान करेंगे।

