
नर्मदापुरम / ललिता षष्ठी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला एक पवित्र व्रत है, जिसे ‘मोरछाई छठ’ या ‘संतान षष्ठी व्रत’ भी कहा जाता है।
मुख्य महत्व
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संतान सुख:
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यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
कथा और मान्यता:
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर योग्य संतान की प्राप्ति होती है और संतान के संकट दूर होते हैं।
ललिता सखी प्राकट्य:
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इस्कॉन और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इसे श्री राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी के प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जो राधाष्टमी से दो दिन पहले पड़ता है।
पूजन विधि
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देवी की आराधना:
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इस दिन माता गौरी, भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है।
प्रसाद:
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पूजा के बाद मेवा, मिष्ठान्न, खीर और मालपुआ का प्रसाद बांटा जाता है। (संकलन – प्रीति चौहान)

