
नर्मदापुरम / केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’- जिसका मूल उद्देश्य ग्रामीण भारत के निर्धन परिवारों को उनकी पुश्तैनी संपत्ति का कानूनी हक देकर आत्मनिर्भर बनाना था।नर्मदापुरम जिले के ग्राम निटाया में प्रशासनिक तानाशाही और रसूखदारों की मिलीभगत की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि जिला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ आशुलिपिक (स्टेनो) प्रथमेश पटेल के रसूख के आगे समूचा स्थानीय राजस्व अमला नतमस्तक हो गया। नियमों को दरकिनार कर मूसलाधार बारिश के बीच एक निर्धन परिवार का टीन शेड और स्वच्छ भारत मिशन के तहत बना सरकारी शौचालय बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में गहरा जनाक्रोश भड़क उठा है। 2018 के ड्रोन सर्वे और जमीनी हकीकत को दरकिनार करने का आरोप स्वामित्व योजना के वैधानिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2018 के पूर्व से ड्रोन सर्वे के दौरान मौके पर पाए गए भौतिक कब्जे के आधार पर ही संपत्ति का मालिकाना हक दर्ज किया जाना अनिवार्य था। प्रारंभिक सर्वे और रिकॉर्ड इसी आधार पर तैयार हुए थे। लेकिन आरोप है कि स्टेनो के परिजनों पिता फूलचंद पटेल एवं चाचा योगीराज पटेल को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से शासकीय अभिलेखों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया। 15 दिन में फर्जी प्रकरण, प्राकृतिक न्याय की खुली अवहेलना पीड़ित भुवनेश्वर पटेल (दुबे) और उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें जबरन बेदखल करने के लिए राजस्व अधिकारियों ने धारा B-121 के तहत कार्यालयीन स्तर पर ही आनन-फानन में फर्जी प्रकरण तैयार किया। पीड़ित पक्ष को न तो कोई विधिक नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का कोई अवसर मिला। प्राकृतिक न्याय (Audi Alteram Partem) के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाते हुए, भारी बारिश के बीच रातों-रात बुलडोजर चलाकर उनका आशियाना ढहा दिया गया। जिस शौचालय का निर्माण केंद्र सरकार के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत कराया गया था, उसे भी प्रशासनिक अमले ने बिना वैध सीमांकन के तोड़कर केंद्र की योजना का खुला उपहास उड़ाया।
नक्शे में रातों-रात ‘रास्ता’ और गैर-मौजूद खसरों का खेल
ग्रामीणों का कहना है कि आबादी भूमि पर जिस स्थान पर कभी कोई रास्ता था ही नहीं, वहां राजस्व नक्शे में मनमाने संशोधन कर नया रास्ता दर्शा दिया गया। गैर-मौजूद खसरा और प्लॉट नंबरों के आधार पर फाइलें तैयार की गईं। इस अवैधानिक कृत्य को कानूनी रूप देने के लिए अब ग्राम पंचायत और ग्राम सभा पर फर्जी प्रस्ताव पारित करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित भुवनेश्वर पटेल ने बताया कि वे पूर्व में भी आवेदन दे चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई और नियम विरुद्ध तरीके से जमीन हड़पने की साजिश रची जा रही है। कमिश्नर और PMO तक पहुंची गूंज, निष्पक्ष जांच की मांग
कलेक्टर स्तर पर सुनवाई न होने से आहत पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने अब इस गंभीर मामले की लिखित शिकायत संभागीय आयुक्त (कमिश्नर) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने शासन से सीधी मांग की है: पद के दुरुपयोग पर रोक निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ स्टेनो प्रथमेश पटेल को तत्काल प्रभाव से जिले से बाहर स्थानांतरित किया जाए दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच लाभान्वित पक्ष के निवास प्रमाण, समग्र आईडी, मतदाता सूची और अन्य रिकॉर्ड्स की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि वे ग्राम निटाया के वास्तविक पात्र निवासी हैं या नहीं। अभिलेख पूर्ववत हों और मुआवजा मिले राजस्व रिकॉर्ड में किए गए दुर्भावनापूर्ण संशोधनों को तत्काल रद्द कर पूर्ववत किया जाए तथा पीड़ित परिवार को मकान व शौचालय क्षति का उचित मुआवजा दिया जाए। जब प्रशासनिक तंत्र ही गरीबों की योजनाओं को रौंदकर प्रभावशाली कर्मियों के परिजनों को लाभ पहुंचाने लगे, तब यह सीधे तौर पर शासन की निष्पक्षता और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि संभाग और राज्य स्तर का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में कब तक संज्ञान लेकर दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
इनका कहना…
दो-तीन महीने पहले मैंने लिखित रूप से शिकायत की थी इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई पंचायत में भी प्रस्ताव पारित करने के लिए बैठक बुलाई गई है इस मामले को लेकर मैंने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत की गई है कि मुझे न्याय दिलाया जाए
भुवनेश्वर पटेल, ग्राम पंचायत कृषक, ग्राम निटाया।

