

नर्मदापुरम / महू / नर्मदापुरम की कला प्रतिभा ने एक बार फिर प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराई। नर्मदापुरम की बेटी सुश्री पूर्वी नगाइच एवं उनके साथी कलाकारों ने इंदौर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पौराणिक स्थल जानापाव कुटी में आयोजित प्रदेश स्तरीय ‘श्रीकृष्ण पर्व’ में श्रीकृष्ण-परशुराम प्रसंग पर आधारित नृत्य नाटिका की शानदार प्रस्तुति दी। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस प्रदेश स्तरीय आयोजन में जानापाव की पावन धरती पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और कला का अनूठा संगम देखने को मिला। पूर्वी नगाइच और उनके ग्रुप ने नृत्य, अभिनय, भावाभिव्यक्ति और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान परशुराम से जुड़े पौराणिक प्रसंग को जीवंत कर दिया।
पूर्वी नगाइच एवं साथी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति में नृत्य की विभिन्न मुद्राओं, अभिनय और भावाभिव्यक्ति का प्रभावी इस्तेमाल किया। मंच पर कलाकारों की प्रस्तुति के साथ पौराणिक कथा का क्रम आगे बढ़ा और दर्शकों को ऐसा अनुभव हुआ मानो श्रीकृष्ण-परशुराम प्रसंग उनके सामने साकार हो रहा हो।
जानापाव की धार्मिक और प्राकृतिक पृष्ठभूमि ने इस प्रस्तुति को और विशेष बना दिया। भगवान परशुराम की जन्मस्थली माने जाने वाले इस पावन स्थल पर उन्हीं से जुड़े प्रसंग को नृत्य नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया जाना कलाकारों के लिए भी गौरव का अवसर रहा।
नृत्य नाटिका की प्रस्तुति के बाद इंदौर के अभिषेक गावड़े एवं ग्रुप द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी गई। भक्ति गीतों की स्वर लहरियों से जानापाव की शांत पर्वतीय वादियां आध्यात्मिक वातावरण में डूब गईं। धार्मिक स्थल की पृष्ठभूमि में नृत्य नाटिका और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
पूर्वी नगाइच के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उन्हें प्रदेश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन में नर्मदापुरम का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। उन्होंने अपने साथी कलाकारों के साथ अपनी कला के माध्यम से नर्मदापुरम की सांस्कृतिक प्रतिभा को बड़े मंच तक पहुंचाया।
जानापाव जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पर श्रीकृष्ण-परशुराम जैसे पौराणिक प्रसंग को नृत्य नाटिका के रूप में प्रस्तुत करना न केवल कलाकारों के लिए बल्कि पूरे नर्मदापुरम जिले के लिए गौरव का विषय है। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, धर्म, साहस, कर्तव्य और लोकमंगल जैसे संदेशों को कला के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया गया।
पूर्वी नगाइच की इस प्रस्तुति को नर्मदापुरम की कला प्रतिभा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश स्तरीय मंच पर प्रस्तुति के जरिए उन्होंने यह साबित किया कि नर्मदापुरम की प्रतिभाएं केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें प्रदेश के बड़े सांस्कृतिक मंचों पर भी अपनी कला दिखाने का सामर्थ्य है।
कला और संस्कृति के क्षेत्र में नर्मदापुरम की बेटियों की भागीदारी लगातार शहर की पहचान को मजबूत कर रही है। पूर्वी नगाइच की जानापाव में हुई यह प्रस्तुति भी इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बनकर सामने आई है।

