नर्मदापुरम / शहर के हालत यह है कि नगर में स्वास्थ्य सुविधा ही नहीं मिल पा रही है आमजन को । तिवारी कॉलोनी निवासी छिंदवाड़ा की मजदूर वर्ग की सदस्य रानी उइके जो कॉलोनी में झुग्गी बनाकर निवास करती है एवं मेहनत मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का जीवन यापन कर रही है और आदिवासी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। रक्षा बंधन के दिन अचानक बहुत अधिक स्वास्थ खराब हो जाने के कारण जब जैसे तैसे शाम को 4:00 बजे शासकीय जिला चिकित्सालय पहुंची तो उन्हें बताया गया कि अभी इलाज नहीं होगा, क्योंकि अस्पताल में कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं है। आखिर ₹200 खर्च कर ऑटो से अस्पताल पहुंची महिला को वापस आना पड़ा और मजबूरी में एक निजी चिकित्सालय में इलाज कराना पड़ा। जहां उसके इलाज में लगभग ₹1000 खर्च हुए गरीब मजदूर वर्ग के लिए इस पैसे की क्या कीमत होती है यह आप और हम समझ सकते हैं। शासन प्रशासन जो गरीब वर्ग का विशेष कर आदिवासी एवं दलित वर्ग का विशेष संरक्षण का दावा करता है, उसके लिए यह घटना दुर्घटना अत्यंत शर्मनाक विषय है जिला प्रशासन को चाहिए कि इस प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच का आदेश देकर उक्त गरीब आदिवासी वर्ग की महिला को आर्थिक मदद पहुंचाया जाये ।

