

नर्मदापुरम / सोहागपुर / विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावों की हकीकत सोहागपुर में उस वक्त बेनकाब हो गई, जब रामगंज वार्ड में बना एक महत्वपूर्ण रपटा (पुलिया) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर बह गया। इस रपटे के टूटने से नगर परिषद के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और इसने स्थानीय लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जो रपटा आज टूट गया है, वह महज 12 साल पहले उस समय बनाया गया था जब नगर परिषद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) काबिज थी। महज़ एक दशक के भीतर ही पुल का इस तरह बह जाना निर्माण में हुए भारी भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। वहीं दूसरी ओर, नगरवासी अब इस घटिया निर्माण की तुलना कांग्रेस शासन काल में बने ‘मछली मार्केट वाले रपटे’ से कर रहे हैं। वर्षों पुराना होने के बावजूद वह रपटा आज भी पूरी मजबूती के साथ सीना ताने खड़ा है। यह साफ दर्शाता है कि नए निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के चलते गुणवत्ता को किस तरह दरकिनार किया गया है।रामगंज वार्ड का यह रपटा सिर्फ एक रास्ता नहीं था, बल्कि शहर के कई वार्डों को जोड़ने वाली एक अहम कड़ी था। इसके टूट जाने से जिन क्षेत्रों का आवागमन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। उनमें प्रमुख हैं:रामगंज, मातपुरा, किलापुरा, राजेंद्र वार्ड, सरदार वार्ड इन इलाकों के हजारों लोगों का रोजाना इसी मार्ग से आना-जाना होता है। इस रास्ते के बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन अभिभावकों और मासूम बच्चों को उठानी पड़ रही है, जो अलसुबह स्कूल जाने के लिए इसी सुलभ रास्ते का इस्तेमाल करते थे। अब लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर या लंबा चक्कर काटकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।

