

नर्मदापुरम / इटारसी / श्रावण मास के पावन पर्व पर वृंदावन धाम से पधारे आचार्य पं. नवल किशोर शास्त्री के श्रीमुख से न्यास कॉलोनी इटारसी स्थित वृंदावन गार्डन में संगीतमय श्री शिवमहापुराण कथा में आज समुद्र मंथन के प्रसंग को विस्तार से बताया।
तृतीय दिवस की कथा में कथावाचक ने दुर्वासा ऋषि के शाप से हीन हुए देवताओं को बलवान बनाने के लिए विष्णु जी की सलाह पर देवताओं और असुरों ने मिलकर यह मंथन किया। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन क्षीर सागर में देवता और दानवों द्वारा अमृत प्राप्ति के लिए किया गया एक ऐतिहासिक और महान प्रयास था। इसमें मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया था तथा भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुआ) अवतार लेकर पर्वत को सहारा दिया था।
मंथन के दौरान विष से लेकर अमृत तक कुल 14 रत्न और दिव्य शक्तियां निकलीं। समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष (हलाहल) को सृष्टि की रक्षा हेतु भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया जिससे उनका नाम नीलकंठ पड़ा।
कथा के मध्य शिव के भजनों पर धर्मप्रेमी श्रद्धालु नृत्य का आनंद भी ले रहे हैं। कल कथा में शिवजी के विवाह का प्रसंग होगा। कथा 12 अगस्त तक चलेगी। सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्राभिषेक पूजन कार्य भी लगातार पंडित अरुण शास्त्री जी के द्वारा करवाया जा रहा है।
विश्व हिंदू परिषद के जिला प्रचार प्रसार प्रमुख अनुरुद्ध चंसौरिया ने सभी सनातनी बंधुओं धर्म प्रेमी सज्जनों से अधिक से अधिक संख्या में आकर धर्म लाभ अर्जित करने का निवेदन किया है। कथा के अंत में भगवान भोलेनाथ की भव्य आरती कर प्रसादी वितरित की गई। वातावरण हर हर महादेव एवं ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गुंजायमान हो गया।

