
नर्मदापुरम / सिवनी मालवा / नगर पालिका अध्यक्ष रितेश ‘रिंकू’ जैन ने सोशल मीडिया और मोबाइल माध्यमों के जरिए कथित रूप से झूठी, भ्रामक एवं तथ्यहीन सामग्री प्रसारित कर उनकी सामाजिक एवं सार्वजनिक छवि को धूमिल करने के प्रयासों के संबंध में थाना सिवनी मालवा पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में फेसबुक, व्हाट्सऐप, मोबाइल कॉल एवं अन्य सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए लगातार कथित आपत्तिजनक एवं भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने की बात कही गई है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल और क्राइम ब्रांच को जांच….
रितेश ‘रिंकू’ जैन के अनुसार पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच क्राइम ब्रांच एवं साइबर सेल को सौंपी है। पुलिस द्वारा मामले में शीघ्र और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है। शिकायत से संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल नंबर और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
थाना प्रभारी सुधाकर बरास्कर ने कहा—जांच के आधार पर होगी कार्रवाई…
मामले को लेकर थाना प्रभारी सुधाकर बरास्कर ने बताया कि नगर पालिका अध्यक्ष रितेश ‘रिंकू’ जैन की ओर से सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक एवं तथ्यहीन सामग्री प्रसारित किए जाने के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच साइबर सेल एवं क्राइम ब्रांच के माध्यम से कराई जा रही है।
थाना प्रभारी ने बताया कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल नंबर और उपलब्ध अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानहानि के मामलों में BNS की धारा 356 का प्रावधान….
कानूनी तौर पर किसी व्यक्ति के संबंध में ऐसा आरोप या कथन प्रकाशित या प्रसारित करना, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनती है, परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 के अंतर्गत मानहानि का विषय बन सकता है। धारा 356(2) में दोष सिद्ध होने पर दो वर्ष तक का साधारण कारावास, जुर्माना, दोनों या सामुदायिक सेवा का प्रावधान है।
हालांकि कानून में महत्वपूर्ण अपवाद भी हैं। उदाहरण के लिए, सत्य बात का प्रकाशन यदि सार्वजनिक हित में हो, तो वह स्वतः मानहानि नहीं बनता। इसी तरह सद्भावना में की गई उचित टिप्पणी या चेतावनी भी परिस्थितियों के अनुसार कानूनी अपवाद के दायरे में आ सकती है। इसलिए किसी सोशल मीडिया पोस्ट को मानहानि मानने के लिए उसके वास्तविक कंटेंट, उद्देश्य, संदर्भ और उससे प्रतिष्ठा को हुई कथित क्षति का परीक्षण आवश्यक होता है।
मानहानि की कार्यवाही में शिकायतकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण….
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 222 के अनुसार BNS की धारा 356 के तहत मानहानि के अपराध का संज्ञान सामान्यतः उस व्यक्ति की शिकायत पर लिया जाता है जो स्वयं उस अपराध से पीड़ित है। यानी मानहानि के मामले में पीड़ित व्यक्ति की शिकायत का विशेष महत्व है।
BNS की प्रथम अनुसूची के अनुसार सामान्य मानहानि गैर-संज्ञेय और जमानती अपराध है तथा इसका विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाता है। इसलिए सोशल मीडिया पर मानहानि का आरोप लगने मात्र से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता; अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
फर्जी आईडी के इस्तेमाल पर भी परिस्थितियों के अनुसार बन सकता है मामला….
रितेश ‘रिंकू’ जैन ने शिकायत में आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्व कथित रूप से फर्जी सोशल मीडिया आईडी एवं मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल पोस्ट की सामग्री ही नहीं, बल्कि यह भी जांच का विषय होता है कि अकाउंट किसने बनाया, किस मोबाइल नंबर या डिवाइस से संचालित हुआ, किस व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया गया और पोस्ट का उद्देश्य क्या था।
यदि किसी व्यक्ति की पहचान या पासवर्ड जैसी पहचान संबंधी जानकारी का धोखाधड़ीपूर्ण इस्तेमाल हुआ हो अथवा कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति बनकर धोखा दिया गया हो, तो परिस्थितियों के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के संबंधित प्रावधान भी जांच में देखे जा सकते हैं। कौन-सी धारा लागू होगी, यह जांच में सामने आने वाले वास्तविक डिजिटल साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल की अपील….
नगर पालिका अध्यक्ष रितेश ‘रिंकू’ जैन ने कहा कि सोशल मीडिया समाज को जोड़ने, संवाद स्थापित करने और जनहित की जानकारी साझा करने का प्रभावी माध्यम है। इसका उपयोग सत्य, सद्भाव और सकारात्मक संवाद के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत द्वेष या वैमनस्य के कारण किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास उचित नहीं है।
‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ने की बात….
रितेश ‘रिंकू’ जैन ने कहा कि उनका जीवन ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत, राष्ट्रसेवा, जनकल्याण तथा प्रत्येक जीव के प्रति दया और करुणा की भावना को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि वे जीवन की अंतिम सांस तक इन्हीं सिद्धांतों के साथ जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।
‘सत्य की सदैव विजय होती है’…..
नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि जो लोग झूठ, भ्रम और असत्य के माध्यम से उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके मामले में कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और जांच के बाद वास्तविकता सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि “सत्य की सदैव विजय होती है और ईश्वर के न्याय से कोई भी बच नहीं सकता।” उन्होंने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

