
नर्मदापुरम / महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर में पदस्थापना और अटैचमेंट को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। पवारखेड़ा बस्ती निवासी दिलीप सराठे ने म.प्र. शासन के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह को आवेदन देकर मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। वन स्टॉप सेंटर में प्रशासक का पद द्वितीय श्रेणी (क्लास-2) अधिकारी स्तर का होता है, जिसके लिए जिले में पदस्थ द्वितीय श्रेणी के परियोजना अधिकारी को ही अतिरिक्त प्रभार दिया जाना उचित है। वर्षों से एक ही स्थान पर अटैचमेंट पर्यवेक्षक पदस्थ श्रीमती प्रतिभा वाजपेयी को विगत 5 से अधिक वर्षों से वन स्टॉप सेंटर में प्रशासक के रूप में अटैच रखा गया है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन्हें मूल पदस्थापना स्थल परियोजना कार्यालय केसला में कार्य करने के कई बार निर्देश दिए गए, फिर भी वे मुख्यालय में ही कार्यरत रहीं और वेतन केसला से आहरित होता रहा। स्थानांतरण आदेश की अनदेखी 15 जून को जारी जिला स्तरीय स्थानांतरण सूची में श्रीमती प्रतिभा वाजपेयी का तबादला केसला से सोहागपुर किया गया था। आरोप है कि उन्होंने न तो केसला से कार्यमुक्त होकर सोहागपुर में प्रभार लिया और न ही आदेश का पालन किया, बल्कि उन्हें पुनः वन स्टॉप सेंटर नर्मदापुरम में संलग्न कर दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि अटैचमेंट संयुक्त संचालक कार्यालय नर्मदापुरम द्वारा किया गया है, जो उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। यह अधिकार जिला कार्यक्रम अधिकारी, कलेक्टर एवं प्रभारी मंत्री के पास होता है।
मूल पदस्थापना स्थल पर कार्य न करने के बावजूद वेतन आहरण की जांच की जाए। स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

