
नर्मदापुरम / आचार्य पुष्कर परसाईं ने बताया कि इस तीर्थ क्षेत्र का आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्त्व है। यहाँ भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरकथा सुनाई थी। आचार्य श्री ने बताया कि अमरनाथ यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, श्रद्धा और आत्मज्ञान की यात्रा मानी जाती है। भगवान शिव ने अमर कथा सुनाने से पहले जिस प्रकार अपने सभी सांसारिक प्रतीकों का त्याग किया, वह संदेश देता है कि आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अहंकार, मोह और आसक्ति का त्याग आवश्यक है।
आयोजन समिति ने आग्रह किया कि जो भी सज्जन कथा समय पर अमरनाथ यात्रा पर पहुंच रहे हैँ, वे कथा श्रवण करने अवश्य पधारें। कथा का आयोजन बर्फ़ानी बाबा सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है।समिति ने बताया कि कथा शुभारम्भ अमरनाथ जी के श्रीचरणों मे पहले अध्याय की कथा सुनाने के साथ होगा कथा का नित्य का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा।

