

नर्मदापुरम / पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार तथा पुलिस अधीक्षक साईंकृष्णा एस. थोटा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन के मार्गदर्शन में सांदीपनि विद्यालय, पवारखेड़ा में “युवा सृजन संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर एवं उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) संतोष मिश्रा, विद्यालय के प्राचार्य संदीपन नीखर, व्यायाम निर्देशक राजेंद्र प्रसाद नामदेव तथा व्याख्याता डॉ. संगीता सूर्यवंशी की उपस्थिति में कक्षा 11वीं एवं 12वीं के लगभग 100 विद्यार्थियों से संवाद स्थापित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना, कानून एवं अपराध की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराना तथा यह समझाना था कि दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन किस प्रकार अपराध का रूप ले सकता है। इसके साथ ही, डिजिटल युग में मोबाइल फोन, इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभावों के प्रति विद्यार्थियों को सजग, संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।
संवाद के दौरान उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) संतोष मिश्रा एवं निरीक्षक श्रीमती राखी मौर्य ने विद्यार्थियों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों, कर्तव्यों तथा कानून के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, समानता एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अधिकार प्राप्त हैं, वहीं दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना, कानून का पालन करना तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन अनेक परिस्थितियों में दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
कार्यक्रम में डिजिटल मीडिया, मोबाइल फोन एवं इंटरनेट के बच्चों पर पड़ने वाले सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि आधुनिक तकनीक विद्यार्थियों को शैक्षणिक संसाधनों तक आसान पहुँच, बेहतर संवाद, रचनात्मक अभिव्यक्ति एवं तकनीकी दक्षता विकसित करने के अवसर प्रदान करती है, किन्तु इसके अनियंत्रित एवं अत्यधिक उपयोग से शारीरिक, मानसिक एवं व्यवहारगत समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में दिखाई देने वाले प्रारंभिक चेतावनी संकेतों—जैसे चिड़चिड़ापन, सामाजिक गतिविधियों से दूरी, आक्रामक व्यवहार, एकाग्रता में कमी तथा भावनात्मक अस्थिरता—के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही, स्क्रीन टाइम प्रबंधन, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी एवं अन्य डिजिटल जोखिमों से बचाव तथा जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता के विषय में विस्तृत चर्चा की गई।
शिक्षकों से विद्यार्थियों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने तथा विद्यालय स्तर पर साइबर सुरक्षा अभियान एवं परामर्श गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 एवं साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग प्रक्रिया की जानकारी भी साझा की गई तथा विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे स्वयं सतर्क रहें और समाज में भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाएँ।
कार्यक्रम के आगामी चरण में विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यप्रणाली एवं कानून-व्यवस्था तंत्र से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराने के उद्देश्य से थाना भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान उन्हें थाने के विभिन्न दायित्वों, शिकायत प्राप्त होने से लेकर वैधानिक कार्रवाई की संपूर्ण प्रक्रिया तथा नागरिक सुरक्षा में पुलिस की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही, आपातकालीन सेवा डायल-112 की कार्यप्रणाली एवं उसकी त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली से भी अवगत कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को पुलिस कंट्रोल रूम का भ्रमण कराते हुए “सेफ सिटी” योजना के अंतर्गत स्थापित आधुनिक निगरानी प्रणाली की जानकारी दी जाएगी। उन्हें शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों, यातायात प्रबंधन व्यवस्था तथा तकनीक-आधारित पुलिसिंग के विभिन्न आयामों से परिचित कराया जाएगा, जिससे उनमें कानून के प्रति सम्मान, नागरिक उत्तरदायित्व एवं सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो सके।
नर्मदापुरम पुलिस ने सभी शिक्षकों एवं अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों को सुरक्षित, सकारात्मक एवं जिम्मेदार डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, ताकि वे इंटरनेट एवं सोशल मीडिया का सुरक्षित, संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग कर सकें।

