

नर्मदापुरम / राजघाट क्षेत्र में चल रहे निर्माण और भराव कार्य को लेकर एक नया मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि राजघाट के पास स्थित मस्जिद के बाजू में मौजूद प्राकृतिक नालीनुमा हिस्से से मिट्टी निकालकर पास की जमीन पर भराव किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह मिट्टी साफ और उपयुक्त नहीं है, बल्कि नाले और गंदगी वाली मिट्टी है, जिसे बिना उचित जांच और तैयारी के भराव में उपयोग किया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मस्जिद के पास एक छोटा प्राकृतिक नाला या नालीनुमा हिस्सा मौजूद है, जहां से मिट्टी उठाकर दूसरी ओर डाली गई है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नाले की गंदगी और खराब मिट्टी को भी भराव में शामिल कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में इस तरह की मिट्टी का उपयोग भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, क्योंकि ऐसी मिट्टी से सही तरीके से कॉम्पैक्शन नहीं हो पाता और जमीन की मजबूती पर असर पड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि बाहर से अच्छी और मजबूत भराव मिट्टी लाने के बजाय मौके पर उपलब्ध मिट्टी का ही उपयोग किया गया, ताकि लागत बचाई जा सके। उनका कहना है कि यदि भराव में सही गुणवत्ता की मिट्टी का उपयोग नहीं किया गया, तो आने वाले समय में वहां होने वाले किसी भी निर्माण की मजबूती संदिग्ध हो सकती है। इसके साथ ही यदि प्राकृतिक नाली को मिट्टी से बंद किया गया है, तो बारिश के दिनों में जल निकासी की समस्या भी खड़ी हो सकती है।
लोगों का आरोप है कि नालीनुमा हिस्से से मिट्टी निकालने और उसी क्षेत्र में भराव करने का काम कुछ दिन पहले किया गया। बताया जा रहा है कि यह मामला तीन से चार दिन पुराना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे कार्य की जांच नगर पालिका और प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भराव में किस प्रकार की मिट्टी का उपयोग किया गया है और क्या प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को प्रभावित किया गया है।
राजघाट क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व का क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यदि प्राकृतिक नाले या जल निकासी मार्ग के साथ छेड़छाड़ की गई है, तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा मुद्दा भी बन सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करे और यदि नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाए।
नागरिकों का कहना है कि किसी भी निर्माण या भराव कार्य में मिट्टी की गुणवत्ता, लेवलिंग, कॉम्पैक्शन और जल निकासी जैसे पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी होता है। यदि इन बातों को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में जमीन धंसने, पानी भरने या निर्माण कमजोर होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और नगर पालिका की कार्रवाई पर है। लोगों ने मांग की है कि मामले की तकनीकी जांच कराई जाए, भराव में उपयोग की गई मिट्टी की गुणवत्ता जांची जाए और प्राकृतिक नाली को यदि बंद किया गया है तो उसे तुरंत खुलवाया जाए।

