
नर्मदापुरम / भ्रष्टाचार और शासकीय धन की बर्बादी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला राजघाट से सामने आया है। जहाँ एक तरफ सरकार विकास कार्यों के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे जनता की गाढ़ी कमाई की ‘कब्र’ खोदी जा रही है। राजघाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और विकास कार्य के दौरान भारी लापरवाही बरतते हुए, पूर्व में लगी लगभग 3 लाख रुपये कीमत की कीमती स्टील ग्रिल को सुरक्षित निकालने के बजाय सीधे मिट्टी में दफन किया जा रहा है। विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। 30 नग कीमती ग्रिल पर डाल दी मिट्टी स्थानीय राजघाट पर पूर्व में बेहद मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाली स्टील की लगभग 30 नग ग्रिल लगाई गई थीं। नियम यह कहता है कि जब भी किसी स्थान का पुनर्विकास होता है, तो पुरानी सामग्री को सुरक्षित निकालकर नगर पालिका के स्टोर में जमा किया जाता है, ताकि उसका उपयोग शहर के अन्य पार्कों या चौराहों पर किया जा सके।परन्तु, राजघाट पर चल रहे काम में नियमों को ताक पर रख दिया गया। यहाँ लगी 30 नग कीमती ग्रिलों को निकालने की जहमत तक नहीं उठाई गई और उनके ऊपर सीधे मिट्टी की फिलिंग (भराऊ) कर उन्हें जमीन के अंदर दबाया जा रहा है। कोठी बाजार स्थित सब्जी बाजार भी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि लाखों रुपए खर्च कर सब्जी विक्रेताओं के लिए टीन शेड बनाया था, लेकिन उस टीन शेड में आज तक सब्जी विक्रेता वहां शेड के नीचे सब्जी नहीं बेचकर खुले मैदान में बैठते हैं। जब यह शेड लाखों रुपए खर्च कर जिस उद्देश्य से बनाया था उसकी उपयोगिता नहीं, तो जनता के लाखों रुपए बर्बाद क्यों किए गए।
एयरकंडीशनर कमरों से बाहर नहीं निकल रहे जिम्मेदार इंजीनियर्स…
इस पूरे मामले ने नगर पालिका के तकनीकी अमले और जिम्मेदार उपयंत्रियों (इंजीनियर्स) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है। दफ्तरों तक सीमित निरीक्षण ऐसा साफ प्रतीत होता है कि जिम्मेदार इंजीनियर्स सिर्फ कागजों पर या दफ्तरों में बैठकर ही कार्यों का ‘निरीक्षण’ कर रहे हैं। उन्हें फील्ड पर क्या चल रहा है, इससे कोई सरोकार नहीं है। ठेकेदार की मनमानी चल रही है। इंजीनियर्स की इसी लापरवाही का फायदा उठाकर निर्माण एजेंसी और ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहे हैं, जिससे शासकीय संपत्ति को सीधा नुकसान पहुँच रहा है।”यह विकास नहीं, जनता के पैसे का सरेआम कत्ल है। इस अंधेरगर्दी को देखकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। सजग ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि “यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार है। जो स्टील ग्रिल अन्य स्थानों पर काम आ सकती थीं, उन्हें मिट्टी में मिलाना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। हमारी मांग इस गंभीर लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मिट्टी में दबाई गई ग्रिलों को वापस निकाला जाए। साथ ही, कार्यस्थल का निरीक्षण न करने वाले दोषी इंजीनियर्स और इस मनमानी के लिए जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

