
नर्मदापुरम / पिपरिया / मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के पिपरिया संभाग में एक अत्यंत चौंकाने वाला और गंभीर प्रशासनिक घोटाला उजागर हुआ है। विभाग में पदस्थ एक ए.आर.ओ. (सहायक राजस्व अधिकारी/बाबू) पर यह गंभीर आरोप लगा है कि उसने उप महाप्रबंधक के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग कर न केवल अपने चहेतों की नई नियुक्तियों की अनुशंसा कर डाली, बल्कि बिना आधिकारिक ‘एम्प्लॉई आईडी’ जनरेट हुए नियमों को ताक पर रखकर उन्हें वेतन का भुगतान भी करवा दिया। इस पूरे खेल में अब नर्मदापुरम और पिपरिया के अधिकारियों व बाबुओं की आपसी साठगांठ और पैसे के लेन-देन के सनसनीखेज आरोप भी सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिपरिया संभाग के अंतर्गत आउटसोर्स कर्मचारियों की नवीन पदस्थापना की जानी थी। नियमानुसार, इसके लिए विभाग प्रमुख के अधिकृत हस्ताक्षर से ही अधिकृत आउटसोर्सिंग एजेंसी को मांग पत्र भेजा जा सकता है। परंतु इस मामले में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को धता बताते हुए संबंधित बाबू ने स्वयं ही उपमहाप्रबंधक के स्थान पर उनके जाली हस्ताक्षर का उपयोग कर नामजद अनुशंसा सूची जारी कर दी। इस पूरे प्रकरण में पिपरिया ग्रामीण उत्तर और दक्षिण वितरण केंद्रों की नियुक्तियां सबसे बड़े संदेह के घेरे में हैं।
बाबूयों और वरिष्ठों की मिली भगत…..
यह पूरा फर्जीवाड़ा नर्मदापुरम और पिपरिया के बाबुओं व वरिष्ठों की गहरी मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। आरोप है कि बाबू और अधिकारियों ने मिलकर मोटी रकम (रिश्वत) लेकर ये अवैध नियुक्तियां की हैं। बैकडेट जॉइनिंग और बिना आईडी वेतन का खेल हुआ है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, फर्जी अनुशंसा पत्र के माध्यम से एक विशेष कर्मचारी (पंचू लाल कुशवाहा) को मीटर रीडर के पद पर नियुक्त किया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि बिना आधिकारिक एम्प्लॉई आईडी बने ही उक्त कर्मचारी का वेतन भी जारी कर दिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़े वित्तीय गबन और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। चर्चा है कि संबंधित ए.आर.ओ. और मीटर रीडर के बीच गहरे व्यक्तिगत संबंध हैं, जिसके चलते इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। साठगांठ का एक और बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब उत्कर्ष’ नाम के एक अन्य कर्मी को नियमों के विरुद्ध जाकर एक दिन पहले ही जॉइनिंग दे दी गई, जबकि उससे संबंधित पेपर बाद में भेजे गए। यह बैकडेट जॉइनिंग का मामला नर्मदापुरम और पिपरिया संभाग के बीच चल रहे संगठित भ्रष्टाचार को पूरी तरह उजागर करता है।
हस्ताक्षरों में अंतर से खुला जालसाजी का राज…..
मामले की तह में जाने पर दो महत्वपूर्ण पत्र सामने आए हैं जो इस जालसाजी की पुष्टि करते हैं, पहला पत्र (क्र./24146) चार मीटर रीडरों (विवेक डोंगरे, अनिल वर्मा, दीपक शर्मा और ब्रजेश रघुवंशी) की सेवा बहाली से संबंधित है, जिनकी मीटर रीडिंग को जांच के बाद सही पाया गया था। दूसरा पत्र (क्र./24546) सात नए कर्मचारियों की पदस्थापना की अनुशंसा करता है। इन दोनों पत्रों में किए गए उपमहाप्रबंधक के हस्ताक्षरों में स्पष्ट और दृश्यमान अंतर देखा जा सकता है, जो प्रथम दृष्टया ही धोखाधड़ी को साबित करता है। पूर्व के विवाद और विभागीय चुप्पी पर सवाल इस बड़े खुलासे के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिजली विभाग के उच्च अधिकारी इस पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे है। यह ए.आर.ओ. का नाम पूर्व में भी पीडीसी मामलों, बिलों को गलत तरीके से बंद करने और अवैध रूप से नवीन कनेक्शन प्रदान करने जैसे गंभीर विवादों में आ चुका है। ऐसे में बिना किसी उच्च विभागीय सहभागिता और नर्मदापुरम-पिपरिया के ज़िम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कर पाना मुमकिन नहीं लगता। उपमहाप्रबंधक दिनेश सिंह भदौरिया का आधिकारिक पक्ष इस पूरे प्रकरण पर जब उपमहाप्रबंधक दिनेश सिंह भदौरिया से बात की गई, तो उन्होंने हस्ताक्षरों में भिन्नता की बात को स्वीकार किया। उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा एक पत्र पर किए गए हस्ताक्षर मेरे स्वयं के हैं, जबकि दूसरे पत्र पर दिखाई दे रहे हस्ताक्षर मयंक शर्मा के हो सकते हैं, जो मेरी अनुपस्थिति में कार्यभार संभालते हैं या हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत हैं। बहरहाल, विभागीय प्रमुख दिनेश सिंह भदौरिया के इस रक्षात्मक बयान के बाद भी कई बुनियादी सवाल अनुत्तरित हैं। यदि हस्ताक्षर अधिकृत थे, तो नियमों को दरकिनार कर ‘उत्कर्ष’ को पेपर भेजने से पहले जॉइनिंग कैसे मिली? और बिना एम्प्लॉई आईडी के पंचू लाल को वेतन भुगतान कैसे हो गया? यह साफ तौर पर पैसों के दम पर की गई नियुक्तियों का मामला नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि बिजली कंपनी का शीर्ष प्रबंधन इस गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक चूक पर क्या कड़ी वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
इनका कहना है….
इस मामले में नियम अनुसार कार्रवाई की गई है। मामला 1 साल पुराना है।
दिनेश भदोरिया,
विद्युत विभाग पिपरिया अधिकारी।
इनका कहना है…
इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारी श्री बागडे से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल रिसीव नहीं हुआ और व्यस्त आ रहा था।

