


इटारसी / नगर में हुई मात्र 30 मिनट की बारिश ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया।। करोड़ों रुपये की लागत से नालों के निर्माण एवं सुधार कार्य किए जाने के बावजूद शहर के कई क्षेत्रों में सड़कें, गलियां और बाजार जलमग्न हो गए। स्थिति यह रही कि कई स्थानों पर वाहनों के टायर तक आधे पानी में डूबे दिखाई दिए, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ता सिद्धार्थ महेश आर्य ने कहा कि नगर पालिका को पूर्व में भी जलभराव एवं नालों की सफाई संबंधी समस्याओं से अवगत कराया गया था, लेकिन आज दिनांक तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जिसका खामियाजा नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि शहर में जिन बड़े नालों का निर्माण किया गया है, उन्हें ढंकने के लिए लगभग 90 लाख रुपये का टेंडर भी जारी किया गया था, लेकिन आज तक अधिकांश नालों को ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नालों में पानी भर जाने के कारण वे दिखाई नहीं देते, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों एवं दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक है।
सिद्धार्थ महेश आर्य ने कहा कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। जिस प्रकार भीषण गर्मी के मौसम में पानी की टंकी निर्माण का कार्य शुरू किया गया था, उसी प्रकार अब बरसात शुरू होने के बाद जल निकासी व्यवस्था एवं नालों को ढंकने की याद आ रही है। यदि समय रहते योजना बनाकर कार्य किए जाते तो आज नागरिकों को ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि शहर के सभी प्रमुख नालों की तत्काल सफाई कराई जाए, खुले नालों को प्राथमिकता के आधार पर ढंका जाए तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
“नगर पालिका किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार न करे, बल्कि दुर्घटना होने से पहले जागे और आवश्यक कदम उठाए।”

