
नर्मदापुरम / आज दिनॉंक 19 जून को राष्ट्रीय महिला जागृति मंच एंव भारतीय जैन संगठन नर्मदापुरम की शाखा ने हाथों में सम्मान पूर्वक ग्रंथ लेकर एवं वाचन कर मनाया। मंच की अध्यक्ष नीरजा फौजदार ने बताया कि श्रुत पंचमी जैन धर्म में ज्ञान, शिक्षा और शास्त्रों को समर्पित एक अत्यंत पावन और ऐतिहासिक महापर्व है। इसका मुख्य महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि निम्नलिखित है।
लिखित ज्ञान की शुरुआत…
इसी शुभ तिथि पर जैन धर्म के पहले आगम (ग्रंथ) ‘षट्खण्डागम’ की रचना पूर्ण हुई थी。इसके रचयिता आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबलि थे。इससे पहले ज्ञान केवल मौखिक रूप से गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से आगे बढ़ता था。ज्ञान की रक्षा: आचार्य धरसेन के निर्देश पर मुनियों द्वारा भगवान महावीर की दिव्य वाणी (श्रुत) को ताड़ के पत्तों पर लिपिबद्ध किया गया, जिससे ज्ञान पीढ़ियों तक सुरक्षित हो सका।
शास्त्रों का सम्मान….
इस दिन जैन मंदिरों में पवित्र ग्रंथों (जिनवाणी) की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है。शास्त्रों की साफ-सफाई और जीर्णोद्धार (मरम्मत) किया जाता है।
दान का महत्व….
इस दिन साधु-संतों को शास्त्र (धार्मिक ग्रंथ) भेंट करने और ज्ञान का प्रसार करने का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व माना जाता है。इसे प्राकृत भाषा दिवस के रूप में भी जाना जाता है। आयोजन में मंच की अध्यक्ष नीरजा फौजदार, महामंत्री अनीता अरुण जैन, उपाध्यक्ष अनीता आर एल जैन, कोषाध्यक्ष रीना रत्नेश जैन, उपाध्यक्ष जयंती जैन, प्रवत्ता श्वेता जैन, संयोजक रचना मस्ते, कार्याध्यक्ष रेखा गोयल, विनिति जैन, रीना रीतेश जैन, उषा गुप्ता, मोनिषा जैन, सांस्कृतिक मंत्री राशि जैन, सुनीता जैन एवं कार्यक्रम में रचना मस्ते एवं विनीति जैन ने सभी सदस्यों को शास्त्र एवं आसन प्रदान किया।

