
नर्मदापुरम / जिले में दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि न्यायालय में चल रहे मुकदमे को वापस लेने और राजीनामा करने का दबाव बनाते हुए एक गरीब मजदूर परिवार पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। घटना कोतवाली और बाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके की है, जहाँ न्याय की आस में भटक रही एक पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक (SP) के समक्ष गुहार लगाकर अपने परिवार की जानमाल की रक्षा की मांग की है। प्राप्त विवरण के अनुसार, आवेदिका और उसका परिवार गन्ने का ठेला लगाकर और मजदूरी कर अपना जीवन यापन करता है। आवेदिका का आरोपी आशु रैकवार, अरविन्द रैकवार और सलौनी यादव के खिलाफ न्यायालय में एक मुकदमा लंबित है। इसी मामले में गवाही देने से रोकने और केस खत्म करने के लिए आरोपियों द्वारा लगातार आवेदिका के परिवार पर दबाव बनाया जा रहा था। पूर्व में दिनांक 4 जून 2026 को भी आरोपियों द्वारा आवेदिका को गवाही देने पर गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिसकी शिकायत पुलिस थाना बाली में की गई थी। परंतु पुलिस द्वारा समय रहते कोई उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस की इसी ढिलाई का फायदा उठाते हुए दिनांक 14 जून 2026 की शाम को आरोपी आशु रैकवार, सलोनी यादव और अरविन्द रैकवार ने लामबंद होकर आवेदिका, उसके पति संजु रैकवार और पुत्र पर हमला बोल दिया। आरोपियों ने सरेराह गाली- गलौच करते हुए जान से मारने की दोबारा धमकी दी। इसी दौरान आरोपी अरविन्द रैकवार ने लाठी से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे आवेदिका के पति संजु रैकवार के बाएं हाथ में गंभीर चोटें आई हैं। उनका हाथ पूरी तरह सूज गया है और वे अत्यधिक दर्द से पीड़ित हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर वारदात के बाद जब पीड़िता रिपोर्ट दर्ज कराने थाना कोतवाली पहुँची, तो पुलिस ने मामले की गंभीरता को दरकिनार करते हुए मात्र एक साधारण एनसीआर लिखकर औपचारिकता पूरी कर ली। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर आवेदिका ने तीखे सवाल उठाए हैं कि “क्या पुलिस हमारे साथ किसी बड़ी अनहोनी या घटना के घटित होने का इंतजार कर रही है ? क्या एक गरीब मजदूर परिवार को न्याय नहीं मिलेगा ? आवेदिका ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे पत्र में आरोपियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने, जानमाल की रक्षा करने और गवाही के मामले में भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित कराने की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार उल्टा पुलिस ने शिकायतकर्ता को पकड़कर कार्रवाई कर दी और थाने में बंद कर दिया।

