सीहोर के होलीपुरा निवासी विवेक गुर्जर ने घटना को दिया अंजाम
पुलिस टीम ने 24 घंटे में अंधे कत्ल का किया खुलासा
पुलिस टीम को 10 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा
दयाराम फौजदार रिपोर्टर राज एक्सप्रेस नर्मदापुरम।
सोहागपुर थाना अंतर्गत एक ढाबा संचालक की सिर में गोली मार कर हत्या कर दी। आरोपी ढाबे पहुंचा, मृतक के पैर छुए और फिर बाइक पर बैठा कर एक सुनसान जगह रानी पिपलिया पुलिया के पास ले गया और देसी पिस्टल से सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए और पिस्टल फेंक कर भाग गया। पुलिस ने इस अंधे कत्ल का खुलासा 24 घंटे में कर दिया। पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन और एसडीओपी संजू चौहान के निर्देशन और थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी के मार्गदर्शन में टीम बनाकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधीक्षक ने सुहागपुर पुलिस टीम को 10 हजार रुपए देने की घोषणा की। पुलिस ने इस वारदात के खुलासा को लेकर पुलिस अधीक्षक में गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता की। उन्होंने बताया कि सचिन पुरविया को उसके मुंह बोले जीजा आरोपी विवेक गुर्जर उर्फ ने गोली मारकर हत्या कर दी। विवेक को अपनी पत्नी के चरित्र शंका के चलते यह वारदात उसने की। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल और बाइक बरामद कर ली है। रात 3 बजे रानी पिपलिया नहर क्षेत्र पर सचिन का शव बरामद हुआ था । आरोपी को शक था कि मृतक सचिन के उसकी पत्नी से संबंध है इसी चरित्र शंका के चलते उसने यह घटना की। आरोपी और मृतक के बीच अच्छे संबंध थे और मृतक सचिन विवेक को जीजा भी कहता था। सचिन भाजपा कार्यकर्ता था और राजपूत ढाबा अजमेरी के पास चलता था।
पिस्टल, मोबाइल, मोटरसाइकिल और कपड़े किए जब्त
जांच के आधार पर संदिग्ध विवेक पुत्र धनीराम गुर्जर निवासी होलीपुरा जिला सीहोर को अभिरक्षा में लिया गया। पूछताछ में अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसने चरित्र संबंधी शंका के कारण मृतक सचिन को बातों में बहला-फुसलाकर राजपूत ढाबा (अजनेरी) से मोटरसाइकिल पर बैठाकर पांजरा रोड,, ग्राम रानी पिपरिया नहर की पुलिया पर ले जाकर सिर में गोली मारकर हत्या की। अभियुक्त के निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त एक देशी पिस्टल, टीवीएस कंपनी की मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन तथा घटना के समय पहने गए कपड़े बरामद किए गए।
कार्यवाही में शामिल पुलिस टीम
थाना प्रभारी निरीक्षक गिरीश त्रिपाठी, उपनिरीक्षक राहुल पटेल, उपनिरीक्षक विवेक यादव, उपनिरीक्षक शहादत अली, सउनि वरूण सिंह, आरक्षक अंकुश, राममोहन, मनोहर दायमा, नंदकिशोर रजक, अफसर खान, राजकुमार, जोशवा मसीह नरेन्द्र भदौरिया तथा सायबर सेल आरक्षक संदीप व दीपेश। इन सभी के समन्वित प्रयास से घटना का खुलासा 24 घंटे के अंदर संभव हुआ।

