
नर्मदापुरम / सोहागपुर / जनपद पंचायत कार्यालय में जनसुनवाई के बाद हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर सामने आए घटनाक्रम के बाद पत्रकारों में नाराजगी देखी जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा मीडिया की रिकॉर्डिंग या समाचार संकलन में अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया है तो ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
पत्रकारों का तर्क है कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और जनता तक सही जानकारी पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि सार्वजनिक कार्यालयों में कैमरे और रिकॉर्डिंग पर आपत्ति जताई जाती है तो इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होती हैं। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालय जनता के लिए हैं और वहां होने वाली गतिविधियों पर सवाल उठाना तथा जानकारी एकत्र करना पत्रकारों का अधिकार है।
घटना के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच हुई तीखी बहस ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद इतना बढ़ गया कि स्थिति को संभालने के लिए तहसीलदार को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि मामला फिलहाल शांत हो गया है, लेकिन पत्रकार संगठन इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
पत्रकारों का कहना है कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह गलत परंपरा को जन्म दे सकती है। उनका मानना है कि प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए और यदि कोई अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब यह मामला केवल एक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना के अधिकार और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा विषय बनता जा रहा है। जिले के पत्रकारों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

