

सिवनी मालवा / नगर के बाईपास रोड पर इन दिनों पेड़ों की लगातार कटाई किए जाने को लेकर शहरवासियों में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग द्वारा विद्युत लाइनों के रखरखाव के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों की शाखाओं और कुछ स्थानों पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
शहरवासियों ने बताया कि वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ नगर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ गर्मी के मौसम में छाया और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं। ऐसे में उनकी अंधाधुंध कटाई चिंता का विषय है।
शहरवासियों ने बताया कि वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ नगर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ गर्मी के मौसम में छाया और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं। ऐसे में उनकी अंधाधुंध कटाई चिंता का विषय है। लोगों ने यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन वन मंत्री सरताज सिंह द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बाईपास मार्ग पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम आज भी दिखाई देते हैं। शहरवासी उनके इस प्रयास को सफल मानते हैं और कहते हैं कि इन्हीं पेड़ों ने वर्षों से क्षेत्र को हरियाली और पर्यावरणीय संतुलन प्रदान किया है।
पर्यावरण प्रेमी चंद्रशेखर बाथव ने कहा कि पेड़ों की कटाई किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि विद्युत लाइनों में पेड़ों की शाखाएं बाधा बन रही हैं तो केवल आवश्यक शाखाओं की छंटाई कर कार्य किया जा सकता है। पूरे पेड़ या अत्यधिक शाखाओं की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है और हरित आवरण कम होता है।
उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पेड़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक तरीके से छंटाई की जाए तथा अनावश्यक कटाई पर रोक लगाई जाए। नागरिकों ने भी नगर के हरित वातावरण को बचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ” का नारा दे रही है और हाल ही में पर्यावरण दिवस भी बड़े धूमधाम से मनाया गया, वहीं दूसरी ओर इस तरह पेड़ों की कटाई लोगों को समझ से परे लग रही है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।

