
नर्मदापुरम / थाना कोतवाली जिला के अपराध अंतर्गत धारा 80 (2) विकल्प में धारा 108 एवं 85 बीएनएस तथा धारा 4 दहेज प्रतिशेध अधिनियम शासन विरूद्ध रामबिहारी उपाध्याय आ. हरिनारायण उपाध्याय एवं अन्य 3 में सत्र न्यायाधीश नर्मदापुरम् के न्यायालय में आज दिनांक 23-मई-2026 को निर्णय पारित किया गया। जिसमें आरोपी रामबिहारी उपाध्याय पुत्र हरिनारायण उपाध्याय को धारा 108 बीएनएस के अंतर्गत चार वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹5,000 के अर्थदंड एवं धारा 85 बीएनएस के अंतर्गत एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड की राशि अदायगी में व्यतिकम पर कमशः छः माह एवं एक माह के सश्रम कारावास भुगताए जाने के आदेश दिए गए। शेष आरापीगणों चंद्रभूषण उपाध्याय, हरिनारायण उपाध्याय एवं सियारानी उपाध्याय को आरोप प्रमाणित न होने के कारण दोषमुक्त किया गया। प्रकरण अभियोजन की तरफ से पैरवी शैलेन्द्र कुमार गौर लोक अभियोजक शासकीय अभिभाषक द्वारा की गई ।
लोक अभियोजक श्री गौर द्वारा बताया गया कि अभियोजन प्रकरण के अनुसार घटना दिनांक 24.10.2025 को रात्रि 12.05 बजे जिला चिकित्सालय नर्मदापुरम् के डाक्टर शुभम सरकार द्वारा थाना प्रभारी कोतवाली नर्मदापुरम् को इस आशय का मेमो प्रेषित किया गया कि मृतिका के परिजनों के द्वारा नर्मदा नदी में डूबने के कारण मृतिका को मृत अवस्था में जिला चिकित्सालय नर्मदापुरम् लाया गया। उक्त घटना पिचिन घाट सर्किट हाउस नर्मदापुरम् दिनांक 23.10.2025 को रात्रि 11.15 बजे घटित हुई थी । उक्त अस्पताल मेमो के आधार पर पुलिस थाना कोतवाली में धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत 4 मर्ग रिपोर्ट लेख की गई। मर्ग जांच के बाद मृतिका के शव का नक्शा पंचयतनामा तैयार किया गया और शव को परीक्षण हेतु जिला चिकित्सालय भेजा गया। शव परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार मृतिका की मृत्यु पानी में डूबने के कारण श्वास अवरूद्ध होने से हुई थी। घटनास्थल का नक्शा मौका तैयार किया गया। मर्ग जांच के दौरान मृतिका के परिजनों एवं अन्य साक्षीगण की साक्ष्यलेखबद्ध की गई, जिनके द्वारा अपने कथनों में यह अवगत कराया गया कि विवाह पश्चात से ही मृतिका के ससुराल वाले मृतिकासे कार एवं रूपयों की मांग कर उसके साथ मारपीट कर उसे प्रताडित करते थे। उक्त प्रताड़ना से तंग आकर मृतिका के द्वारा आत्महत्या की गई है। मर्ग जांच पश्चात अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 80 (2), 85, 108,3,5 बीएनएस एवं धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। ।
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से 12 साक्षियों के कथन लेखबद्ध कराए गए, जिन पर विश्वास करते हुए अभियुक्त को सश्रम कारावास के दण्ड से दंडित किया गया ।

