
इटारसी / न्यास कॉलोनी में पिछले लंबे समय से सीवेज मिश्रित दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वहीं नगर के कई अन्य क्षेत्रों में पेयजल पाइपलाइनें नालियों एवं सीवेज लाइनों के अंदर/समीप से गुजर रही हैं, जबकि कई स्थानों पर पाइपलाइनें टूटी हुई हैं। इसके कारण गंदा एवं दूषित पानी सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों को सुबह आने वाले पानी को 15–20 मिनट तक बहाना पड़ता है, इसके बाद भी बदबूदार एवं गंदा पानी प्राप्त हो रहा है, जबकि पानी सप्लाई का समय भी लगभग एक घंटे तक सीमित है। स्थानीय नागरिकों में बीमारी फैलने को लेकर भय एवं नाराजगी का माहौल बना हुआ है।
सिद्धार्थ वेलफेयर फाउंडेशन के अधिवक्ता सिद्धार्थ महेश आर्य ने बताया कि नगर पालिका अधिकारियों को इस समस्या की पूरी जानकारी होने के बावजूद आज दिनांक तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। जनवरी 2026 से लगातार शिकायतें, प्रेस वार्ताएं एवं आवेदन दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा।
उन्होंने बताया कि पाइपलाइन शिफ्टिंग हेतु फरवरी 2026 में टेंडर जारी किया गया था, लेकिन पाइपलाइन सामग्री का टेंडर समय पर जारी नहीं किया गया। लगभग 80 लाख रुपये का नया टेंडर लगाया गया, जिसे 8 मई 2026 को खोला गया, लेकिन आज दिनांक तक उसका अनुबंध तक नहीं हुआ है।
सबसे गंभीर बात यह है कि नगर पालिका के अधिकारी स्वयं यह कह रहे हैं कि टेंडर ओपन होने के बाद 15 दिन की प्रक्रिया रहती है, जबकि अधिकारियों एवं बाबुओं को पहले से पता था कि जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई।
न्यास कॉलोनी से सुबह 7 बजे दूषित पानी के नमूने एकत्रित कर भोपाल लैब में जांच हेतु भेजे गए हैं।
यह भी कहा गया कि गर्मी एवं संभावित पेयजल संकट को देखते हुए पूर्व में ही उच्च स्तर से सभी नगर पालिकाओं को आवश्यक तैयारियां एवं वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए थे, ताकि नागरिकों को गर्मी के दौरान जल संकट एवं दूषित पेयजल जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद इटारसी नगर पालिका द्वारा समय रहते न तो प्रभावी तैयारी की गई और न ही गंभीर शिकायतों के बाद त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की गई, जिसके कारण आज नागरिक गंभीर जल संकट एवं दूषित पेयजल की समस्या झेलने को मजबूर हैं।
वहीं दूसरी ओर जल आवर्धन/मुख्यमंत्री पेयजल योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये खर्च कर नई पाइपलाइनें डाली गईं, लेकिन आज तक कई स्थानों पर उनकी टेस्टिंग तक नहीं हो पाई है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिद्धार्थ वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में दूषित पेयजल के नमूनों की रिपोर्ट आगामी 4–5 दिनों में प्राप्त होने की संभावना है। यदि जांच रिपोर्ट में पानी दूषित पाया जाता है, तो मामले को सीधे माननीय न्यायालय के समक्ष ले जाया जाएगा तथा जनहित एवं जनस्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए Mandamus Writ दायर की जाएगी।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण में दोषी अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाएगा तथा उनकी जवाबदेही न्यायालय के समक्ष निर्धारित कराई जाएगी। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल निलंबन एवं कठोर कार्यवाही की मांग की गई है।

