
सिवनी मालवा / तहसील मुख्यालय से करीब 48 किमी दूर सतपुड़ा पर्वत पर बसे आदिवासी गांव बारासेल, भावंदा, बैंठ, नापुपुरा, घोघरा, पीपलगोटा, नयागांव, जाटामऊ और बासपानी सहित आदिवासी ग्रामों में 50 से अधिक आवास 9 साल बाद भी अधूरे हैं । आवास योजना के अन्तर्गत भोले भाले आदिवासी आज भी आवास पूरे होने की बाट जोह रहे हैं ।
अब इन अधूरे आवास का जबाब देने वाला भी कोई नहीं है । 7-8 सचिव भी बदल चुके हैं बहाना मिल जाता है कि हमारे समय का काम नहीं है इसलिए हमें जानकारी नहीं है तहसील मुख्यामलय से 48-50 किमी दूर स्थित इन पंचायतों और उनके ग्रामों तक पहुंचने के लिए पैदल या निजी वाहन के अलावा और कोई साधन नहीं है । इसलिए भी इन ग्रामों के लोगों ने जनपद आफिस के 2-4 चक्कर पर लगाकर आना बंद कर दिया । प्रशासनिक दृष्टि से सचिवों के स्थानान्तर भी हो चुके हैं अभी तक 7-8 सचिव बदल गये हैं । जो वर्तमान में हैं उन्हें इन आवासों के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं है । जानकार सूत्र बताते हैं कि जब आवास योजना शुरू हुई थी तब सरकारी रुपया आदिवासियों के ही खाते में आता था सचिव में हितग्राही आदिवासियों को बैंक बुलाता था बैंक के विड्रोल पर हस्ताक्षर कर लेने के बाद बैंक से पैसा रूपया निकाल कर आदिवासियों को दे दिया करते थे अब प्रश्न यह है कि विड्रोल कितने रूपों को भर गया था कितना रुपया आदिवासियों के हाथ में आया था इसका आज 9 साल बाद कोई रिकॉर्ड नहीं है । इतना अवश्य है कि रूपों की कमी के कारण आदिवासियों के आवास पर छत नहीं डल पाई जबकि कुछ आदिवासियों ने तो लोहा और गिट्टी भी खरीद कर रख ली थी । 9 साल से अधूरे पड़े आवास के मकान के संबंध में जब सिवनी मालवा जनपद की सीईओ श्रीमति श्रुति चौधरी से पूछा गया तब उन्होंने बताया कि आदिवासी पंचायत में अधूरे पड़े आवास योजना के मकान का सर्वे कराया जा रहा है शासन की योजना के अनुसार अब इन आवासों पर टीम चढ़ाये जाएंगे ।

