
नर्मदापुरम / राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी करोड़ों की भूमि को हथियाने की साजिश का मामला सामने आया है। ग्राम तरौंदा ढाना निटाया में ‘स्वामित्व योजना’ की आड़ में सरकारी बेशकीमती भूमि को खुर्द-बुर्द करने का यह गंभीर मामला है। ग्रामीणों ने वर्तमान सरपंच पर पद के दुरुपयोग और भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कलेक्टर और संभाग आयुक्त को शिकायती पत्र सौंपा है। ग्राम तरौंदा ढाना के वर्तमान सरपंच राजेन्द्र ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-46 से लगी हुई सरकारी आबादी मद की भूमि को अपने पुत्र प्रताप सिंह ठाकुर के नाम कराने का षडयंत्र रचा है। नियम अनुसार स्वामित्व योजना का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जिनके मकान वर्ष 2018 से पहले वहां बने हुए थे, जबकि विवादित भूमि पूरी तरह रिक्त है।
कलेक्टर के आदेशों की हुई अवहेलना……..
तत्कालीन कलेक्टर सोनिया मीणा उक्त सरकारी भूमि पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराना चाहती थीं। उन्होंने इस संबंध में तहसीलदारों को मामले के त्वरित निराकरण के आदेश दिए थे, लेकिन स्थानीय रसूख के चलते तहसीलदारों ने कलेक्टर के आदेश को ताक पर रख दिया और मामला 6 महीने तक लंबित रखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच स्वयं उस निर्णय समिति के अध्यक्ष हैं जो आपत्तियों का निपटारा करती है। ऐसे में वे अपने ही पुत्र द्वारा लगाई गई बनावटी आपत्तियों पर निष्पक्ष फैसला कैसे दे सकते हैं? ग्रामीणों ने पटवारी और तहसील स्तर के अधिकारियों पर भी मिलीभगत का संदेह जताया है। रवि कुमार एवं ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सरपंच को पद से पृथक कर निष्पक्ष जांच हो। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों की सैटेलाइट इमेज का अवलोकन कर जाए भूमि की वास्तविक स्थिति पता की जाए। करोड़ों की इस भूमि पर निजी ‘ढाबा’ खोलने के बजाय अस्पताल, आंगनवाड़ी या पशु चिकित्सालय जैसे सरकारी कार्यालय बनाए जाएं। ग्रामीणों ने कहा यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे ग्रामीण न्यायालय की शरण लेंगे
तहसीलदार को दिए थे जांच के आदेश…….
तत्कालीन कलेक्टर और तत्कालीन कमिश्नर ने इस मामले में ग्रामीण क्षेत्र के तहसीलदार को निष्पक्ष जांच कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। लेकिन तहसीलदार ने लीपा पोती कर कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि तत्कालीन कलेक्टर सोनिया मीणा इस क्षेत्र में ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाना चाहती थीं । लेकिन तहसीलदार की मिली भगत से आज तक ना तो रिपोर्ट तैयार की गई ना कोई कार्रवाई हुई। तत्कालीन कलेक्टर सोनिया मीणा उक्त सरकारी भूमि पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाना चाहती थीं। उन्होंने दोनों तहसीलदार को इस मामले में तत्काल निराकरण करने के आदेश भी दिए थे लेकिन कलेक्टर के आदेश को नहीं माना और 6 महीने तक इसको पेंडिंग में रखा। बताया जाता है कि एक अधिकारी को लेनदेन के कारण यह मामले को रुकवाया गया है।
इनका कहना है…..
प्रकरण लंबित है। स्वामित्व योजना में पंचायत स्तरीय टीम होती है। इसमें सचिव सरपंच प्रस्ताव पारित करते हैं। एक पत्र पंचायत को भेजा है । तहसील में प्रस्ताव आएगा फिर आगे जांच की जाएगी।
दिव्यांशु नामदेव….
तहसीलदार ग्रामीण नर्मदापुरम।

