
इटारसी / नगर पालिका द्वारा शहर के कई वार्डों में कचरा कलेक्शन व्यवस्था निजी एजेंसी को सौंपे जाने तथा कचरा शुल्क एवं दोगुने संपत्ति कर को लेकर शहर में लगातार असमंजस और नाराजगी का माहौल बनता जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर युवा समाजसेवी एवं एडवोकेट सिद्धार्थ महेश आर्य ने नगर पालिका प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है।
सिद्धार्थ आर्य ने कहा कि नगरवासियों को अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर 125 रुपये प्रतिमाह प्रति संपत्ति का शुल्क कौन देगा, किस आधार पर लिया जाएगा और इसकी कानूनी प्रक्रिया क्या है। अलग-अलग समाचार माध्यमों में अलग-अलग जानकारी आने से आम नागरिक भ्रमित और परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि यदि नगर पालिका के पास पहले से संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है तो निजी एजेंसी द्वारा दोबारा “मैपिंग” और सर्वे कराने की आवश्यकता क्या है। जनता यह जानना चाहती है कि यह सर्वे केवल सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए है या भविष्य में अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की तैयारी की जा रही है।
सिद्धार्थ आर्य ने यह भी कहा कि नगर में अभी तक सफाई व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। कई क्षेत्रों में वही पुरानी कचरा गाड़ियां, वही धीमी व्यवस्था और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। ऐसे में बिना जमीनी सुधार किए सीधे शुल्क बढ़ाना जनता के साथ अन्याय है।
उन्होंने दोगुने संपत्ति कर के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन नागरिकों को पहले इस नियम की जानकारी ही नहीं थी, उन पर अचानक दोगुना आर्थिक भार डालना उचित नहीं कहा जा सकता। यदि कोई नई व्यवस्था लागू करनी है तो पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए और नागरिकों को पर्याप्त समय दिया जाए।
सिद्धार्थ आर्य ने मांग की कि नगर पालिका और निजी एजेंसी के बीच हुए अनुबंध को सार्वजनिक किया जाए, शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए तथा वार्ड स्तर पर खुली जनसुनवाई आयोजित कर नागरिकों की राय ली जाए।
उन्होंने कहा कि जनता पर बोझ डालने के बजाय नगर की सफाई व्यवस्था, जल निकासी, सड़क और मूलभूत सुविधाओं में वास्तविक सुधार होना चाहिए। इटारसी की जनता पारदर्शिता चाहती है, भ्रम और दबाव की राजनीति नहीं।

