
इटारसी / नगरपालिका द्वारा इटारसी नगर के एक बड़े हिस्से का कचरा कलेक्शन कार्य निजी संस्था को दिए जाने की खबर के साथ ही नगर के नागरिकों में भारी भ्रम और असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है। अलग-अलग समाचार पत्रों में शुल्क वसूली को लेकर अलग-अलग जानकारी प्रकाशित हुई है, जिससे आम जनता परेशान और चिंतित है।
एक ओर यह कहा जा रहा है कि 125 रुपये प्रति माह प्रति संपत्ति सीधे नागरिकों से वसूले जाएंगे और समय पर भुगतान न करने पर अधिभार भी लगाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर यह जानकारी सामने आ रही है कि यह राशि नगर पालिका द्वारा ठेकेदार को दी जाएगी और नागरिकों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। ऐसे में नगरवासियों को स्पष्ट जानकारी देना नगरपालिका और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। आज भी जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस दिखाई दे रही है — वही पुरानी कचरा गाड़ियां, वही पुरानी अनाउंसमेंट व्यवस्था, वही कार्यशैली। बल्कि कई स्थानों पर तो ड्राइवर के साथ सहायक कर्मचारी भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। केवल “मैपिंग” के नाम पर सर्वे जैसा कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जिला कांग्रेस कमेटी नर्मदापुरम अध्यक्ष शिवाकांत गुड्डन पाण्डेय ने इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज करते हुए कहा कि आखिर ऐसी क्या आवश्यकता आ पड़ी कि नगर पालिका को कचरा संग्रहण जैसे कार्य को निजी ठेकेदार को सौंपना पड़ा? क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं है ? उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संपत्ति कर के आधार पर ही शुल्क लिया जाना है तो नगर पालिका के रिकॉर्ड से ही डाटा लिया जा सकता है, फिर निजी एजेंसी द्वारा सर्वे और मैपिंग कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि “प्रति संपत्ति” की परिभाषा क्या है और यह शुल्क अनिवार्य होगा या नागरिकों को सेवा लेने अथवा न लेने का विकल्प रहेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पाण्डेय ने कहा कि 600 रुपये वार्षिक से सीधे 1500 रुपये वार्षिक तक शुल्क बढ़ाना आम जनता पर सीधा आर्थिक बोझ डालना है। बिना किसी जमीनी सुधार और व्यवस्था परिवर्तन के इतनी बड़ी वृद्धि किसी भी स्थिति में उचित नहीं कही जा सकती। उन्होंने मांग की कि जब तक ठेकेदार एजेंसी अपनी पूरी व्यवस्था — स्वयं के वाहन, शुल्क संग्रहण प्रणाली, मैपिंग व्यवस्था और नागरिकों को स्पष्ट जानकारी — तैयार नहीं कर लेती, तब तक इस व्यवस्था को स्थगित रखा जाए। साथ ही नगरपालिका और एजेंसी के बीच हुए अनुबंध को सार्वजनिक किया जाए ताकि क्षेत्रीय पार्षद और आम नागरिक वास्तविक स्थिति जान सकें। इसी प्रकार दोगुने संपत्ति कर को लेकर भी आमजन में भय और भ्रम की स्थिति है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में कर जमा न करने पर दोगुना कर वसूली के नियम को तत्काल प्रभाव से लागू करना अन्यायपूर्ण है। जिन नागरिकों को इस नियम की जानकारी नहीं थी, उन पर पुराने बकाया पर दोगुना कर थोपना आम जनता का आर्थिक शोषण है।
जिला कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि यदि यह नियम लागू करना ही है तो इसे आगामी वित्तीय वर्ष 2027-28 से लागू किया जाए और वर्तमान वर्ष तक नागरिकों को स्पष्ट सूचना देकर राहत दी जाए। नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कन्हैया गोस्वामी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता पर थोपे जा रहे इस आर्थिक बोझ का पुरजोर विरोध करती है और शीघ्र ही कलेक्टर महोदय से मिलकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराएगी। आवश्यकता पड़ने पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू औरX अन्य संस्थाओं के समक्ष भी मामला उठाया जाएगा। जनता पर बोझ नहीं, सुविधाओं में सुधार चाहिए। यह जानकारी जिला कांग्रेस प्रवक्ता अनिल रैकवार द्वारा दी गई।

