
नर्मदापुरम / मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए बिसात बिछ चुकी है। दिल्ली के सत्ता गलियारों से छनकर आ रही खबरों ने प्रदेश के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। चर्चा है कि कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह के विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी रवीश कुमार चौहान के रूप में एक ऐसा चेहरा उतारने जा रही है, जो पिछले तीन दशकों से ‘परिवारवाद’ के खिलाफ एक वैचारिक युद्ध लड़ रहे हैं।
मोदी-शाह की ‘क्लीन पॉलिटिक्स’ का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार सार्वजनिक मंचों से परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए ‘कैंसर’ और ‘विकास की बाधा’ बताते आए हैं। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी नेतृत्व इस बार कथनी और करनी की एकता सिद्ध करने के मूड में है। रवीश कुमार चौहान ने न केवल कांग्रेस में, बल्कि स्वयं की पार्टी (बीजेपी) में भी परिवारवाद का डटकर विरोध किया है।
अतीत के पन्ने —-
जब सिद्धांतों के लिए छोड़ा था साथ रवीश कुमार का इतिहास संघर्षपूर्ण रहा है। 1998 में जब नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के प्रभारी थे, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री राजकुमार पटेल के भाई को टिकट मिलने पर रवीश कुमार ने खुलकर विरोध किया था और परिवारवाद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बीजेपी का दामन थामा था। इतना ही नहीं, 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान जब विदिशा और होशंगाबाद से साधना सिंह का नाम चर्चा में आया, तब भी उन्होंने हाईकमान को परिवारवाद के खतरों से अवगत कराया। उनके इसी कड़े रुख के कारण अंततः रमाकांत भार्गव को टिकट मिला।
दिग्विजय सिंह बनाम रवीश कुमार….
एक रोचक मुकाबला बीजेपी इस मुकाबले को व्यक्ति बनाम व्यक्ति नहीं, बल्कि ‘विचारधारा बनाम परिवारवाद’ बनाना चाहती है।13 बार एक ही परिवार को टिकट दिग्विजय सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एक ही परिवार को 13 बार लोकसभा, विधानसभा और महापौर के टिकट दिए। जवाब में किसान पुत्र बीजेपी रवीश कुमार चौहान के रूप में एक ऐसे किसान नेता और पिछड़ा वर्ग के चेहरे को आगे कर रही है, जिनकी छवि बेदाग और निर्विवाद है। क्यों गंभीर है रवीश कुमार का नाम? स्वच्छ छवि बीजेपी के पूर्व किसान मोर्चा प्रदेश महामंत्री के रूप में उनकी पहचान एक निष्ठावान और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता की है। पिछड़ा वर्ग और किसान कार्ड मध्य प्रदेश की राजनीति में ओबीसी और किसानों का बड़ा प्रभाव है, जहाँ रवीश कुमार की सीधी पैठ है। दिल्ली की सक्रियता बताया जा रहा है कि दिल्ली दरबार ने उनके राजनीतिक प्रोफाइल की पूरी जानकारी तलब की है। बीजेपी अक्सर अपने प्रयोगों से विरोधियों को पस्त करती आई है। यदि रवीश कुमार चौहान के नाम पर मुहर लगती है, तो यह न केवल दिग्विजय सिंह के लिए बड़ी चुनौती होगी, बल्कि पूरे देश में बीजेपी के ‘एंटी-डायनेस्टी’ (परिवारवाद विरोधी) एजेंडे को नई धार देगा।

