




नर्मदापुरम / रायसेन / एक जिला–एक उत्पाद (ODOP) की अवधारणा के साथ प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन लगातार प्रयासरत हैं। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप नए-नए पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। इसी क्रम में केवलाझिर इन दिनों प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के अनूठे संगम के रूप में तेजी से उभर रहा है।
नर्मदापुरम से लगभग 46.9 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल प्रशासनिक रूप से रायसेन जिला के अंतर्गत आता है, लेकिन आसपास के जिलों के लोगों के लिए यह प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन चुका है। भोपाल–होशंगाबाद मार्ग के समीप ओबेदुल्लागंज तहसील के पास स्थित यह स्थल NH 146B के माध्यम से लगभग 1 घंटा 20 मिनट में आसानी से पहुँचा जा सकता है। हरियाली से भरपूर वातावरण और सुगम पहुँच इसे एक आदर्श डे-ट्रिप स्पॉट बना रही है।
केवलाझिर की विशेष पहचान यहाँ स्थित प्राचीन शिव मंदिर और प्राकृतिक गुफा है। गुफा के भीतर चट्टानों से निरंतर रिसने वाला जल ‘झिर’ कहलाता है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत पवित्र मानते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस झिर के जल में स्नान करने से चर्म रोगों में राहत मिलती है, जिसके चलते यहाँ श्रद्धालुओं का गहरा विश्वास बना हुआ है।
सतपुड़ा की निचली पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा यह क्षेत्र मानसून में और अधिक मनोहारी हो उठता है। झरनों की कलकल ध्वनि, हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, वहीं धार्मिक अवसरों पर यहाँ विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए यहाँ पहुँचते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता, आस्था और लोकविश्वास का यह अद्भुत संगम केवलाझिर को क्षेत्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिला रहा है। आने वाले समय में यह स्थल पर्यटन और आध्यात्मिक दृष्टि से और अधिक विकसित होने की संभावनाएं समेटे हुए है।

