
नर्मदापुरम / मध्य प्रदेश में एम एस पी पर गेहूं खरीदी किसानों के अभिशाप बन गई है, भाजपा सरकार जो झूठे वादे कर सत्ता में आई है। उसे गरीबों या किसानों के हितों से कोई लेना देना नहीं है जो व्यक्ति इतना अनुभव हीन कि कभी दूध का रकवा बढ़ाता है तो कभी गुड़ बोने कि बात करता है वो आज प्रदेश का मुख्यमंत्री है, यह प्रदेश का दुर्भाग्य है । उक्त बात कहते हुए कांग्रेस नेता धर्मेन्द्र तिवारी कहा है कि इस बार गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सुनिश्चित करने के बजाय सरकार ने किसानों के खिलाफ एक सुनियोजित ‘षडयंत्र किया है। बारदाने की कमी, सैटेलाइट सर्वे और स्लॉट बुकिंग जैसी व्यवस्थाओं के जरिए किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने से रोका जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे छोटे, मझोले और बड़े सभी वर्ग के किसान प्रभावित हो रहे हैं और सरकार का गेहूं खरीदी का लक्ष्य सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।
बारदाने की कमी का बहाना, खरीदी एक महीने लेट इसके पीछे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के वर्चस्व की लड़ाई भी एक बड़ा कारण है एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए स्पर्धा चल रही है जिसका खामियाजा गरीब किसान भोग रहा है ।
भाजपा सरकार ने सबसे पहले बारदाने की कमी का बहाना बनाकर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को करीब एक महीना पीछे खिसका दिया. खरीदी में देरी का सीधा नुकसान छोटे किसानों को हुआ, जिन्हें अपनी जरूरतों और समय के दबाव के साथ बैंकों से वसूली का दबाव, बिजली बिल वसूली का दबाव बनाकर सरकार ने ही किसान को औने‑पौने दाम पर बिचौलियों को गेहूं बेचने के लिए मजबूर किया । और दूसरी तरफ सैटेलाइट सर्वे के नाम पर छोटे किसानों को बाहर किया।
जब गेहूं खरीदी शुरू हुई, तब सरकार ने नया बहाना सैटेलाइट सर्वे का बना दिया। कांग्रेस नेता धर्मेन्द्र तिवारी के अनुसार, हजारों छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग इस आधार पर अस्वीकार कर दी गई कि उनके खेतों की फसल सैटेलाइट सर्वे में सत्यापित नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो फसल किसान अपनी आंखों से खेत में देख रहा है, वह सैटेलाइट से कैसे ‘अस्वीकृत’ हो सकती है।
तिवारी ने सरकार को चेताते हुए कहा कि अति का अंत होता है और अब भाजपा भी अपने अंत के मार्ग पर बढ़ चुकी है ।

