
नर्मदापुरम / आस्था और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संगम के रूप में रविवार को स्थानीय चित्रगुप्त घाट एक विशेष अभियान का साक्षी बना। अखिल भारतीय कायस्थ समाज की मातृशक्ति और पुरुष इकाई ने भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच मां नर्मदा की स्वच्छता के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का परिचय दिया। समाज के सदस्यों ने न केवल घाट की सीढ़ियों को साफ किया, बल्कि नर्मदा की लहरों के बीच जाकर वहां फंसी फूल-मालाएं और अन्य अपशिष्ट सामग्री को बाहर निकालकर डस्टबिन के हवाले किया। जल ही जीवन और संस्कार है अभियान के दौरान अखिल भारतीय कायस्थ समाज के अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि, मां नर्मदा का अस्तित्व ही इस अंचल का गौरव है। श्रद्धा का अर्थ जल को प्रदूषित करना नहीं, बल्कि उसे सहेजना है। हमारा उद्देश्य केवल एक दिन की सफाई नहीं, बल्कि हर नागरिक के मन में यह भाव जगाना है कि नर्मदा की निर्मलता को बनाए रखना हमारा संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है। वहीं, मातृशक्ति की अध्यक्ष ज्योति वर्मा ने अपनी प्रभावी बात रखते हुए कहा कि, एक माँ ही प्रकृति और संस्कारों का संरक्षण बेहतर ढंग से कर सकती है। आज की भीषण गर्मी में भी महिलाओं का यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि हम नर्मदा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं। हम श्रद्धालुओं से करबद्ध प्रार्थना करते हैं कि पूजन सामग्री जल में विसर्जित न कर, उसे निर्धारित डस्टबिन में ही डालें ताकि हमारी जीवनदायिनी नदी सुंदर और स्वच्छ बनी रहे। श्रद्धालुओं से मार्मिक अपील सफाई के साथ-साथ समाज के स्वयंसेवकों ने घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को जागरूक भी किया। उन्होंने निवेदन किया कि मां नर्मदा को स्वच्छ रखने में सहयोग करें और किसी भी प्रकार की पॉलिथीन या कचरा जल में न डालें। स्वच्छता के इस महायज्ञ में नगर पालिका उपाध्यक्ष अभय वर्मा व समाजसेवी प्रीती खरे, सेवानिवृत्त शिक्षिका मंजू वर्मा, रश्मि सक्सैना, सारिका सक्सेना, रश्मि वर्मा, ऋचा श्रीवास्तव, रितु श्रीवास्तव, सुनील राय, गुड्डू वर्मा, मनोज वर्मा, सीबी खरे, लालता प्रसाद एवं अदिति सहित समाज के अनेक गणमान्य जन और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से नर्मदा को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया।

