
नर्मदापुरम / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक ने नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के कामकाज में बड़ी विसंगति को दूर करते हुए एक कड़ा आदेश जारी किया है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के हस्तक्षेप के बाद, अब स्वास्थ्य निरीक्षक (Sanitary Inspector) अनुराग तिवारी को उनके मूल पद के अनुरूप दायित्व सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला ?……
दरअसल, नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) श्रीमती हेमेश्वरी पटले द्वारा कार्य विभाजन के दौरान स्वास्थ्य निरीक्षक अनुराग तिवारी के मूल अधिकारों को छीनकर उनके अधीनस्थ (कनिष्ठ) कर्मचारी कमलेश तिवारी (सफाई दरोगा) को सौंप दिया गया था। कमलेश तिवारी को न केवल शहर की संपूर्ण साफ-सफाई, बल्कि वाहनों के रखरखाव, डीजल-पेट्रोल और स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी दे दिए गए थे।
इस ‘नियम विरुद्ध’ कार्य विभाजन के खिलाफ अनुराग तिवारी ने उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका (क्रमांक 8170/2026) दायर की थी। न्यायालय के निर्देश पर संयुक्त संचालक ने मामले की जांच की और पाया कि सीएमओ द्वारा किया गया कार्य विभाजन शासन के नियमों और पदसोपान (Hierarchy) के विपरीत था।
संयुक्त संचालक के आदेश के मुख्य बिंदु…….
संभागीय संयुक्त संचालक आर.एस. मंडलोई ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी वरिष्ठ पद के कार्य को कनिष्ठ श्रेणी के कर्मचारी से कराना नियमों का उल्लंघन है। आदेश के तहत अब अनुराग तिवारी को निम्नलिखित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग से संबंधित संपूर्ण कार्य एवं गतिविधियां।
संपूर्ण नगरीय क्षेत्र की साफ-सफाई व्यवस्था।
स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी का दायित्व।
स्वच्छता वाहनों का रखरखाव और डीजल-पेट्रोल की व्यवस्था।
ट्रेचिंग ग्राउंड, FSTP, MRF सेंटर और सीएंडडी वेस्ट का प्रबंधन।
स्वास्थ्य शाखा से संबंधित भंडार (Store) का कार्य।
सीएमओ को चेतावनी: 3 दिन में पालन करें……
आदेश में सीएमओ श्रीमती हेमेश्वरी पटले को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 3 दिवस के भीतर नया कार्य विभाजन आदेश जारी कर अनुराग तिवारी को ये सभी प्रभार सौंपें। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि इस आदेश का पालन नहीं होता है, तो इसे न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा, जिसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वयं सीएमओ की होगी।
इस आदेश से यह साफ हो गया है कि प्रशासनिक पदों की गरिमा और नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन कितनी जल्दी इस आदेश पर अमल करता है।

