
नर्मदापुरम / जिला मुख्यालय के पॉश इलाके हाउसिंग बोर्ड (न्यास कॉलोनी) में सरकारी जमीन को निजी जागीर बनाने का एक बड़ा खेल सामने आ रहा है। आईटीआई और शंकर मंदिर के पीछे स्थित करोड़ों की सरकारी भूमि और नगर पालिका के स्वामित्व वाले खंडहरों पर तथाकथित रसूखदारों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। विडंबना यह है कि इस अवैध कब्जे को ‘मजबूत’ करने के लिए बेसहारा पशुओं का ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
नगर पालिका की उदासीनता का फायदा उठा रहे कब्जाधारी…..
न्यास कॉलोनी के शंकर मंदिर के पीछे की जिस भूमि पर वर्तमान में हलचल बढ़ी है, वह पूर्व में गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) की थी। बाद में यह क्षेत्र नगर पालिका के अधीन (हैंडओवर) कर दिया गया था। यहाँ कई ऐसे आवास और भूखंड हैं, जिनके मूल खरीदारों द्वारा समय पर बैंक या बोर्ड की किस्तें न जमा करने के कारण प्रशासन ने उन्हें राजसात कर अपने कब्जे में ले लिया था। सालों से खाली पड़े इन लाखों रुपये के खंडहरों और जमीनों पर अब भू-माफियाओं की नजर है।
पशुओं की आड़ में रची जा रही पक्के निर्माण की साजिश…..
क्षेत्रीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहल्ले के ही एक रसूखदार ‘दुबे परिवार’ ने नगर पालिका की खाली भूमि पर अपना आधिपत्य जमाने का नया तरीका निकाला है। आवारा घूमने वाले दो पशुओं को वहां बांधकर नागरिकों को यह बताया जा रहा है कि वहां ‘गौशाला’ संचालित की जा रही है। लेकिन पर्दे के पीछे की हकीकत कुछ और ही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कब्जाधारी अब वहां गुपचुप तरीके से टिन शेड डालने और पक्का निर्माण करने की नींव तैयार कर रहे हैं। मोहल्ले वासियों का कहना है कि धार्मिक कार्य का बहाना बनाकर असल में बेशकीमती सरकारी जमीन को हड़पने की तैयारी है।
आईटीआई और हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र बना अवैध कब्जों का ‘हब’…..
अवैध कब्जे का यह मामला सिर्फ एक स्थान तक सीमित नहीं है। आईटीआई और हाउसिंग बोर्ड के पीछे के हिस्सों में भी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यदि प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेकर इन कब्जों को नहीं ढहाया, तो आने वाले समय में इन सरकारी संपत्तियों पर आलीशान बंगले और व्यावसायिक दुकानें तन जाएंगी, जिन्हें बाद में खुर्द-बुर्द कर निजी लाभ के लिए बेच दिया जाएगा।
स्थानीय जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका…..
सीएमओ से मांग की है कि इस क्षेत्र का तत्काल सीमांकन कराया जाए। सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वाले ‘सदा कथित’ लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को खुर्द-बुर्द होने से बचाया जा सके।

