
नर्मदापुरम / विदिशा / अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद, विदिशा इकाई के तत्वावधान में बंधन गार्डन में महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विचार संगोष्ठी में वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन, उनके वैचारिक परिवर्तन और समाज सेवा के कार्यों पर प्रकाश डाला।
पुष्पांजलि और नमन…..
कार्यक्रम का शुभारंभ सम्राट अशोक की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया। इस दौरान परिषद के पदाधिकारियों, ओबीसी एकता परिषद के सदस्यों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई और महान सम्राट को नमन किया।
चण्डशोक से धम्मशोक की यात्रा……
द लायंस इंटरनेशनल मल्टीपल एवं डिस्ट्रिक्ट सह-मल्टीमीडिया प्रभारी और अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी लायन अरुण कुमार सोनी ने सम्राट अशोक के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ ‘कलिंग युद्ध’ का उल्लेख किया। उन्होंने बताया:
हृदय परिवर्तन…….. कलिंग युद्ध की विभीषिका, नरसंहार और रोते-बिलखते बच्चों व महिलाओं को देख सम्राट अशोक का हृदय द्रवित हो उठा।
धम्मघोष का मार्ग—— युद्ध के बाद उन्होंने ‘भेरीघोष’ (युद्ध का नाद) को त्यागकर ‘धम्मघोष’ (शांति और धर्म का मार्ग) को अपनाया। वे ‘चण्डशोक’ से ‘धम्मशोक’ बन गए।
जनकल्याण —– उन्होंने अपना जीवन जनसेवा में समर्पित कर दिया। सड़कों के किनारे छायादार और फलदार वृक्ष लगवाए और जनहित के अनेक कार्य किए।
शिलालेख —– सम्राट ने धर्म की शिक्षाओं को ऊंचे शिलाखंडों और चट्टानों पर अंकित करवाया, ताकि जन-सामान्य उन्हें पढ़ सके और जीवन में उतार सके।
विदिशा और सांची का गहरा नाता……
लायन अरुण कुमार सोनी ने सम्राट अशोक के विदिशा से जुड़े संबंधों पर विशेष चर्चा की। उन्होंने विदिशा निवासी उनकी पत्नी देवी, और उनके पुत्र महेन्द्र व पुत्री संघमित्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सांची के स्तूपों के निर्माण और बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में विदिशा की ऐतिहासिक भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
प्रमुख उपस्थिति…….
इस विचार संगोष्ठी में नीरज कुशवाहा, पूर्व पार्षद नवनीत कुशवाहा, रविंद्र यादव, उमराव सिंह कुशवाहा, कृष्णा कुशवाहा (ठर्र), उमराव सिंह कुशवाहा (अहमदपुर) सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभी ने सम्राट अशोक के शांति और सद्भाव के संदेश को आज के समय में प्रासंगिक बताया।

