
नर्मदापुरम / चैत्र नवरात्र का आठवां दिन मां महागौरी के नाम है। देवी जगदंबा ने कठिन तपस्या कर गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से संपूर्ण विश्व में विख्यात हुईं हैं। देवी महागौरी ने भगवान् भोलेनाथ को पतिरूप में पाने के लिए हजारों सालों तक कठिन तपस्या की थी जिस कारण इनका रंग काला पड़ गया था परंतु बाद में भगवान शिव ने माता के वर्ण को फिर से गौर कर दिया और इनका नाम महागौरी विख्यात हुआ। उनकी कथा बहुत सुखदायी है। यह अमृत उद्गार देवी भागवत कथा दक्षिणेश्वरी माता महाकाली सांस्कृतिक उत्सव समिति द्वारा सतरस्ते पर आयोजित देवी भागवत कथा में राजराजेश्वरी बाराही धाम डुंगारिया जिला सीहोर से पधारे सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय कथा वाचक आचार्य पं जितेन्द्रिय महाराज (बशिष्ठ) ने व्यक्त किए। आचार्य जी ने माता शताक्षि, देवसेना, शाकंभरी, हरछट माता, सहित अन्य अनेक देवियों के चरित्र सुनाए। जिनको सुनकर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध हो गए।
सजाई गई महागौरी और लक्ष्मी जी की झांकी…..
कथा स्थल पर आचार्य पं जितेन्द्रिय महाराज के मार्गदर्शन में आयोजन समिति द्वारा प्रतिदिन देवियाें की आकर्षक झांकी सजाई जा रही हैं। कन्याओं को देवी स्वरूप में तैयार कर कथा व्यास पीठ के समीप आसन लगाया जाता है। जब देवियों का आगमन कथा स्थल पर होता है तो पंडाल में विराजमान श्रद्धालुओं के द्वारा पुष्प वर्षा की जाती है। उसके बाद आरती की जाती है। महागौरी को सफेद रंग के बैल पर विराजमान कर चलित झांकी तैयार की गई। सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव के साथ ने दर्शन किए।
कल कन्या भोज के बाद शाम को निकलेंगे जवारे
आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रकाश शिवहरे ने बताया कि शुक्रवार को देवी भागवत कथा विश्राम दिवस है। कथा प्रतिदिन की तरह दोपहर 2 से पांच बजे तक जारी रहेगी। आज नौ देवी की झांकी सजाई जाएगी। शनिवार को कन्या भोज, प्रसाद वितरण के बाद सायंकाल नारी शक्ति और समिति सदस्यों के साथ नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में जवारे निकाले जाएंगे। जिनकी शोभायात्रा माता महाकाली दरबार से प्रारंभ होकर मां नर्मदा के पावन तट पर पहुंचकर जवारों का विसर्जन किया जाएगा।

