सिवनी मालवा / मध्यप्रदेश शासन के आईएएस पूर्व गृह सचिव एवं सिवनी मालवा के पूर्व एसडीएम ओमप्रकाश श्रीवास्तव धर्मपत्नी श्रीमती भारती श्रीवास्तव पूर्व सहायक संचालक शिक्षा विभाग 10 दिसम्बर से मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा कर रहे हैं ।
मंगलवार को जब वे ग्राम पथोडा सीहोर से पैदल यात्रा कर रहे, तब रामशंकर दुबे ने मुलाकात की। श्री श्रीवास्तव ने अपनी पैदल परिक्रमा का अनुभव साझा किया। उन्होने बताया कि मां नर्मदा के तट पर लोगों का सेवा भाव बडा प्रबल है । यात्रियों को भोजन आवास देना उनका ध्यान रखना के लिए आश्रम के साथ आम जनता भी करती है । ऐसा मां नर्मदा के अलावा किसी भी परिक्रमा में देखने को नहीं मिलता । उन्होने बताया कि जीवन ऐसा जीना चाहिए कि उद्देश्य की प्राप्ति हो । श्रीमद्भागवत गीता में उपनिषदों पुराणों का सार है, जो हमें बताता है कि हमें किस प्रकार रहे, हम संसार में ऐसे रहे कि सफलता असफलता से हम विचलित ना हों । हम कर्म तो करें, पुरूषार्थ तो करें लेकिन हम शोक चिंता में न डूबे । ये सभी हमें श्रीमद्भागवत से सीखने को मिलता है । वहीं रामचरितमानस मानस में उसका पेक्टीकल है ।
मां नर्मदा परिक्रमा में हम भगवान शंकरजी एवं मां नर्मदा का कीर्तन करते हैं । भगवान शंकर की पुत्री है मां नर्मदा। नाम संकीर्तन के साथ सारी साधनाओं का उद्देश्य अत:करण की शुद्धि ही है । परिक्रमा में हमें कृतघ्नता का भाव जागृत होता है । दैवीय गुण का बोध होता है । पैदल परिक्रमा वासी मां नर्मदा के किनारे चलना चाहते है । मध्यप्रदेश शासन से हम निवेदन करते हैं कि मां नर्मदा के किनारे कई ग्राम पंचायते को नर्मदा किनारे की पगडंडी को व्यवस्थित करके बरसात में ऊगी झाडियों को साफ करें एवं साइन बोर्ड लगवाये, जिससे नर्मदा पैदल परिक्रमा करने वालों को यात्रा सुगम हो ।

