
नर्मदापुरम / पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के तीसरे दिन की शुरुआत मानस कोकिला श्रीमती कृष्णा देवी मिश्रा ने करते हुए कहा कि जब रावण द्वारा अपमानित होकर श्री विभीषण भगवान की शरण में जाने को तैयार हो जाते हैं तब वह 6 भक्तों का स्मरण करते हैं अर्थात इस तरह वे भगवान से मानसिक संबंध रखने वाले अर्थात निरंतर प्रभु का ध्यान करने वाले भगवान शंकर, मां जानकी और भरत जी का स्मरण करते हैं। इसके साथ ही भगवान की कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव करने वाले माता अहिल्या, दंडक वन एवं मारीच को भी वे याद करते हैं ।इस तरह इन सभी के स्मरण से विभीषण जी प्रभु की शरणागति की ओर यात्रा प्रारंभ करते हैं। आपने कहा कि सत्संग अति दुर्लभ है और यही नवधा भक्ति में प्रथम भक्ति है। प्रथम भगति संतन कर संगा, यही एक मात्र ऐसी भक्ति है जिसमें कोई शर्त नहीं है, अर्थात किसी विशेष पात्रता की आवश्यकता नहीं होती है। हम सब भी विभीषण जी की तरह ही अपनी सामर्थ्य, स्वभाव भूलकर संशय ग्रस्त हैं। श्री हनुमान जी जैसे सद्गुरु का सत्संग पाकर विभीषण की सामर्थ्यवान हो जाते हैं ।श्रीमद् भागवत में जब उद्धव जी गोपियों का सत्संग प्राप्त करते हैं तब वह भक्ति को सही रूप में पहचान पाते हैं। सत्संग से ही जीवन में विश्वास आता है। हमारी नजरे दोष नहीं गुण देखने लगती हैं। श्री हनुमान जी विभीषण को भरोसा देते हैं हम जैसे भी हैं भगवान हमें स्वीकार कर लेते हैं । विभीषण जी ऐसे साधु हैं जो आदर के समय भी हित की बात करते हैं और जब रावण चरन प्रहार करके उन्हें सभा से निकाल देता है तब भी वह रावण की हित की ही बात करते हैं। किंतु भक्त के अपमान को भगवान क्षमा नहीं करते। अंबरीश दुर्वासा प्रसंग में इसका उल्लेख आता है। इसी तरह जब रावण विशेषण जी का अपमान करता है, तो तुलसीदास जी रावण के लिए अभागा शब्द का प्रयोग करते हैं। इस तरह विभीषण जी की शरणाग गति की यात्रा प्रारंभ हो जाती है और जब जीव भगवान की शरण में जाता है तो वही क्षण शुभ होता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में पंडित गिरिजा शंकर शर्मा पूर्व विधायक के साथ आशीष शर्मा, एल एल दुबे, ओ एन चौबे, बालकृष्ण शर्मा, रामभरोस महाते, अजय सैनी द्वारा श्रीमती कृष्णा देवी का स्वागत किया गया ।भजनाजलि के गायिका निशा हरियाले द्वारा भजन की प्रस्तुति दी गई आपके साथ हारमोनियम पर श्री राम परसाई एवं तबले पर आनंद नामदेव द्वारा सहयोग किया गया। कार्यक्रम का समापन श्रीमती कृष्णा देवी के गाए हुए शयन पद से हुआ.।

