
सिवनी मालवा / किसानों ने आ रही समस्या को लेकर सिवनी मालवा अनुविभागीय अधिकारी को एक पत्र लिखा जिसमें उल्लेख किया कि वर्तमान समय में ई-उपार्जन पोर्टल पर किसानों के ई-पंजीयन को लेकर आए दिन समस्या आ रही हैं। कभी पोर्टल बंद रहता है, तो कभी सर्वर डाउन रहता है। अभी पोर्टल से किसानों के मोबाइल पर ओटीपी नहीं जा रहा है। जिसके कारण किसानों का समय अकारण ही व्यर्थ जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार का एम पी किसान एप भी पिछले वर्षों से नक्कारा सिद्ध हो रहा है, करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित इस एप से प्रदेश के किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा है, अतः…..
1. ई-उपार्जन पोर्टल के अवरोधों को दूर करवाकर किसानों के ई-पंजीयन की अवधि को तत्काल बढ़ाया जाए। ताकि किसान समय पर पंजीयन करवा सकें।
2. ग्रीष्मकालीन मूंग के विकल्प के रूप में मुख्यमंत्री की मंशानुरूप उड़द की 55 दिन की अवधि में पकने वाला प्रमाणित उड़द का बीज बुआई से 5 दिन पूर्व 80% अनुदान पर उपलब्ध कराया जाए।
3. रबी की मुख्य फसल गेहूं की नरवाई प्रबंधन हेतु प्रत्येक पटवारी हल्का में दस-दस बेलर मशीन, दस-दस भूसा मशीन और दस-दस हार्वेस्टर कंबाइन मशीन उपलब्ध करवाए जाएं।
4. एस एम एस के बिना हार्वेस्टर चलाने की अनुमति दी जाए अथवा प्रत्येक गांव गांव में सात सात एस एम एस युक्त हार्वेस्टर उपलब्ध करवाये जाएं।
5. ई विकास प्रणाली में रासायनिक खाद के ई-टोकन में सम्मिलित भूमि स्वामियों में से किसी एक को, (सिकमी बंटाईदारों का टोकन सहित) किसी एक को पूरे रकबे का निर्धारित ई-टोकन जारी किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
6. ग्रीष्मकालीन फसल उड़द और मूंग के लिए रासायनिक खाद डीएपी एवं यूरिया किसानों की मांग के अनुसार समय से पहले पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाया जाए।
7. ग्रीष्मकालीन/जायद फसलों क ई-उपार्जन में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाना सुनिश्चित किया जाए, भेदभावपूर्ण भावांतर भुगतान योजना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है।
8. तवा परियोजना बांयी तट नहरों में ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई हेतु पानी 25 मार्च 2026 से पूरी क्षमता से एक साथ छोड़ा जाए, ताकि नरवाई जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।
9. ग्रीष्मकालीन समय में संभावित आगजनी की घटनाओं पर रोकथाम के लिए प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर अग्निशमन वाहन/दमकल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्रत्येक ग्राम पंचायत में पेयजल टेंकर पर इंजन पंप लगाकर कर पानी भरकर रखना सुनिश्चित किया जाए।
10. वर्तमान स्थिति में कृषि पर बड़ती लागत मे किसान अत्यधिक कर्ज के दबाव मे जीवन यापन कर रहा है, प्रथम किसान आयोग की अनुशंसाऐ अनुसार C2+50 फार्मूले मे संपूर्ण लागत, किसान परिवार की मजदूरी के साथ जमीन का किराया और कृषि ऋण के ब्याज को शामिल करने का प्रावधान है इसके अनुसार 65,500 रूपए को लागत मे जोड़ा जाकर लागत का देढ गुना 32750 रूपए जोड़कर, प्रति एकड 18 कुन्टल उत्पादन को आधार मानकर 5458 रूपए गेंहू का समर्थन मूल्य तय कर न्यूनतम गारंटी कानून बनाया जावे।

