नर्मदापुरम / शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन के मार्गदर्शन एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. संगीता अहीरवार के संयोजन में वेस्ट टू वैल्थ साइंटिफिक इनोवेशन विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन नें बताया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उद्देश्य लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, विज्ञान तकनीक के महत्व के बारे में जागरूकता लाना, छात्राओं को वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रेरित करना एवं नई वैज्ञानिक खोजों और नवाचारों को प्रोत्साहित करना है। वेस्ट टू वेल्थ सिद्धान्त कम करना, पुनः उपयोग करना एवं पुनः चक्रण अवधारणा पर आधारित है। यह ना केवल पर्यावरण की रक्षा करता है बल्कि रोज़गार के अवसर भी पैदा करता है। महाविद्यालय में कचरे से कला की अवधारणा पहले से ही प्रचलन में है। सभी छात्राएँ सकारात्मक सोच और जागरूकता से अपने अपने घर अपने महाविद्यालय, समाज और अपने देश में पर्यावरणीय सुधार कर सकते हैं। डॉ. जैन ने बताया कि यह दिन महान वैज्ञानिक सी. वी. रमन द्वारा ऐतिहासिक खोज रमन प्रभाव की याद में मनाया जाता है। 28 फरवरी 1928 को उन्होने प्रकाश के प्रकीर्णन से जुड़ी इस ऐतिहासिक खोज की घोषणा की थी जिसके लिए उन्हे नोबल पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ था।
कार्यक्रम की संयोजक वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. संगीता अहिरवार ने अपने उदबोधन मे कहा कि बेकार वस्तुओं को ऐसी वस्तुओं में बदलना अब जरूरी हो गया है जो उपयोगी हो। अवशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण को नुक़सान होता है। वैज्ञानिक विधियों से कचरे को पुनर्राेपयोगी बनाया जा सकता है। मुख्य अतिथि के रूप शासकीय एमएलबी महाविद्यालय भोपाल से पधारे डॉ. दीपक अहिरवार ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के प्रारंभ होने से शहरों में स्वच्छता दर बढ़ी है, परंतु कचरे के निपटान की समस्या भी बढ़ी है। इसलिए हमें कचरे के प्रत्येक कण को पुनः उपयोग कर प्रदूषण कम करना हैं। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक को नष्ट होने में पाँच सौ साल का साल का समय लगता है, प्लास्टिक से हम ईट एवं सड़क निर्माण कर सकते हैं, जैविक कचरे से बायोगैस, वर्मी कम्पोस्ट आदि आधुनिक तकनीक के द्वारा अवशिष्ट का पुनः उपयोग कर सकते हैं। हमें गांवों में कचरे के पुनरूपयोग करने के लिए प्लांट लगाना होगा जिससे रोज़गार बढ़ेगा और अवशिष्ट को उपयोगी भी बनाया जा सकता है। हमें प्लास्टिक का उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए पर्यावरण संरक्षण आज की महती आवश्यकता है। पर्यावरणविद आनंद पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें ये प्रयास करना चाहिए कि कचरा ही ना हो जिससे इसके निपटान की समस्या ही ना हो, इन्सान ने धरती को अपनी संपत्ति मान लिया है, हम धरती के रखवाले हैं कि उन्होंने कहा कि प्लास्टिक हटाओ धरती बचाओ, बदलाव की शुरुआत स्वयं से ही होगी। हमें स्मार्ट नागरिक बनना होगा, उन्होंने बताया कि भोपाल में तीन कचरे का कलेक्शन कैफे हैं ऐसे ही कैफ़े निर्माण देश में हर जगह होना चाहिए, उन्होंने कई ऐसे उत्पादों का प्रदर्शन भी किया जो कचरे से निर्मित हुए थे जैसे थैला धान की भूसी से स्ट्रॉ। शासकीय कन्या महाविद्यालय सिवनी मालवा के प्राचार्य डॉ. उमेश धुर्वे नेकचरे को समस्या न मानकर अवसर माना। उन्होंने बताया कि हम मनुष्य ही हैं जो हमारे ईको सिस्टम को असंतुलित कर रहे रहे हैं सिंगल यूज प्लास्टिक देश की सबसे बड़ी समस्या है। जागरूकता ही सबसे समाधान है। प्रकृति से हम जो ले रहे हैं, उसे हमें वापस भी करना आवश्यक है। हम कोशिश करें कि ऐसी वस्तुओं का प्रयोग न करे जिसका दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता है। सोसायटी फॉर एडवांस रिसर्च इंप्लांट साइंस की अध्यक्ष डॉ. रूचिता श्रीवास्तव ने अवशिष्ट के इतिहास बताते हुए कहा कि 1950-1959 तक जब जानवरों के वेस्ट का प्रबंध ही किया जाता था। परन्तु 1970 में सर पीटर ने सभी प्रकार के वेस्ट पर ध्यान आकर्षित किया। महाविद्यालय की छात्रा अनन्या शर्मा ने इस विषय पर अपना पेपर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रगति जोशी ने एवं आभार प्रदर्शन प्रो. आर के चौकीकर ने किया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था, जिसके प्रमाण पत्रों का वितरण महाविद्यालय की प्राचार्य द्वारा विजेता छात्राओं को किया गया। समिति की सचिव डॉ. रागिनी सिकरवार, डॉ. हर्षा चचाने, डॉ. कंचन ठाकुर, डॉ. मनीष चंद्र चौधरी, श्रीमती प्रीति मालवीय ने सक्रिय सहयोग दिया तथा तकनीकि सहयोग शैलेन्द्र तिवारी, बलराम यादव, मनोज सिसोदिया ने किया। इस अवसर पर विशेष रूप से वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. भारती दुबे, डॉ. श्रीकांत दुबे उपस्थित रहीं। कार्यशाला में डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, डॉ. अमित मन्हास, डॉ. हेमंत चौधरी, डॉ. मनीषा तिवारी, धीरज खातरकर महाविद्यालयीन स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

