


नर्मदापुरम / बैतूल ज़िले के टिकारी क्षेत्र की मूल निवासी स्वर्गीय श्रीमती संतोष वर्मा का 23 फरवरी (सोमवार) को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अंतिम समय में उनका उपचार इंदौर के Chohitram अस्पताल में चल रहा था। मृत्यु के तुरंत बाद अत्यंत भावनात्मक और मानसिक रूप से विचलित कर देने वाले ऐसे कठिन समय में उनकी पुत्री श्रीमती मृदुला चौधरी (इटारसी) ने अद्भुत मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए पाँचों बहनों से परामर्श किया और नेत्रदान, त्वचा दान तथा देहदान का निर्णय लिया। परिवार के अनुसार, अपनी माँ को उस अवस्था में देखते हुए भी समाजहित में निर्णय लेना अत्यंत कठिन था, किंतु उन्होंने “सही कार्य” को प्राथमिकता दी।
उनके नेत्रदान से दो व्यक्तियों को दृष्टि प्राप्त होगी, जबकि त्वचा दान से केवल बर्न पीड़ित ही नहीं बल्कि जन्मजात विकृतियों तथा अन्य गंभीर चिकित्सकीय परिस्थितियों से जूझ रहे अनेक लोगों के जीवन में राहत, पुनर्स्थापन और नई उम्मीद की नेमतें लौट सकेंगी। इसके पश्चात उनके पार्थिव शरीर को देहदान हेतु Index Medical College Hospital & Research सेंटर को समर्पित किया गया, जहाँ 150 से अधिक मेडिकल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अध्ययन एवं अनुसंधान का अवसर प्राप्त होगा।
शासन की योजना के तहत गार्ड ऑफ ऑनर……
अंतिम विदाई से पूर्व शासन की अंगदान-देहदान प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत श्रीमती संतोष वर्मा को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
इंदौर के सुदामा नगर क्षेत्र से उनकी शवयात्रा निकाली गई। अत्यंत भावुक दृश्य में पाँचों बेटियों ने अपनी माता की अर्थी को कंधा दिया।
गायत्री परिवार की परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक अंत्येष्टि क्रिया संपन्न की गई। नाती-नातिनों, दामादों और परिजनों ने भी अर्थी को कंधा देकर अंतिम विदाई दी। आध्यात्मिक गरिमा और अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ उन्हें विदा किया गया।
39 वर्ष की आयु में पति को खोया, पाँच बेटियों को अकेले संभाला….
करीब 40 वर्ष पूर्व, जब वे मात्र 39 वर्ष की थीं, उन्होंने अपने पति स्वर्गीय श्री रविशंकर वर्मा, विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विषय के पूर्व व्याख्याता, को खो दिया था। इसके बाद पाँच बेटियों की शिक्षा, संस्कार और विवाह की संपूर्ण जिम्मेदारी उन्होंने अकेले निभाई।
सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मसम्मान उनका सबसे बड़ा आधार रहा। वे अंतिम समय तक अध्ययनशील रहीं—तीन-तीन अखबार पढ़ती थीं तथा गीता और रामायण का नियमित पाठ करती थीं। साहस, स्वाभिमान, अनुशासन और आत्मनिर्भरता उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ थीं।
सात वर्षों की सेवा — बेटी और दामाद का त्याग……
पिछले सात वर्षों से, जब से उनकी तबीयत गंभीर रूप से प्रभावित रहने लगी थी और विशेषकर पिछले तीन वर्षों में, उनकी सेवा की सबसे अधिक जिम्मेदारी उनकी पुत्री श्रीमती मृदुला चौधरी और उनके पति नारायण प्रसाद चौधरी ने उठाई। नारायण प्रसाद चौधरी, प्राचार्य सी एम राइज स्कूल इटारसी ने अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी सास की सेवा का दायित्व भी पूरी निष्ठा से निभाया।
जिस समाज में अक्सर कहा जाता है कि “दामाद सास की जिम्मेदारी नहीं निभाते”, उस समाज में उन्होंने इस धारणा को गलत सिद्ध किया।
उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है। तमाम आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी पत्नी का पूरा साथ दिया और सेवा को प्राथमिकता दी। घर पर अनेक थेरेपिस्ट की व्यवस्था की गई। अस्पताल ले जाना, चिकित्सा समन्वय, देखभाल — सब कुछ उन्होंने संतुलित ढंग से संभाला।
नए घर में माँ के लिए अलग कक्ष….
श्रीमती मृदुला चौधरी ने अपने निर्माणाधीन नए घर में अपनी माँ के लिए एक विशेष कक्ष का प्रावधान किया था। यह निर्णय केवल उनका नहीं था — उनकी दोनों नातिनों की भी स्पष्ट इच्छा थी कि नानी का अपना सम्मानजनक, स्वतंत्र कमरा हो।
नातिनों की भूमिका…..
नातिन स्पर्श चौधरी, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता हैं तथा
आई आई टी बॉम्बे से शिक्षित हैं।
उन्होंने कई अवसरों पर व्यक्तिगत रूप से नानी को अस्पताल ले जाने, व्यवस्थाएँ संभालने और भावनात्मक रूप से परिवार का साथ देने का दायित्व निभाया।
छोटी नातिन विभूति चौधरी……
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में वडोदरा में सिविल इंजीनियर अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उपचार के दौरान उन्होंने नौ महीने तक गुजरात में चिकित्सा व्यवस्था कराने सहित सक्रिय सहयोग दिया।
“सच्चा धर्म जीवित माता-पिता की सेवा में है” — श्रीमती मृदुला चौधरी
श्रीमती मृदुला चौधरी का स्पष्ट मत है:….
“सच्चा धर्म जीवित माता-पिता की सेवा में है। जीते-जी माता-पिता को कष्ट देकर बाद में कर्मकांड करना धर्म नहीं हो सकता।”
वे पूर्व शिक्षिका, कवयित्री और लेखिका रही हैं। पूर्व में कुर्मी क्षत्रिय पटेल समाज सेवा समिति (सरदार पटेल समाज सेवा समिति) की अध्यक्षा रह चुकी हैं तथा वर्तमान में गायत्री परिवार इटारसी
की ट्रस्टी हैं।
परिवार का मानना है कि सही मायनों में श्रीमती मृदुला चौधरी ने अपनी माता की आजीवन सेवा कर और अंतिम निर्णयों के माध्यम से अपने माता-पिता के ऋण के साथ-साथ उनके वंश का नाम भी रोशन किया है।
1 मार्च को “महर्षि दधीचि सम्मान”
देहदान, अंगदान एवं रक्तदान दिवस के अवसर पर 1 मार्च को इंदौर में स्वर्गीय श्रीमती संतोष वर्मा को मरणोपरांत “महर्षि दधीचि सम्मान” प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के राज्य मंत्री (सड़क परिवहन) हर्ष मल्होत्रा होंगे।
एक प्रेरक विरासत…..
अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लिया गया यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणा है। स्वर्गीय श्रीमती संतोष वर्मा ने अपने जीवन में संघर्ष, आत्मसम्मान और संस्कारों की मिसाल प्रस्तुत की — और मृत्यु के बाद भी समाज को जीवन देने का मार्ग चुना। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश है कि कर्तव्य, सेवा और साहस ही सच्चे अर्थों में धर्म हैं।

