
नर्मदापुरम / जिले की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक तहसील सोहागपुर को जिला बनाए जाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश एक्का के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सोहागपुर एसडीएम को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की ऐतिहासिक, प्रशासनिक और भौगोलिक मजबूती का हवाला देते हुए जिला गठन की मांग की। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जब आज का नर्मदापुरम (पूर्व नाम होशंगाबाद) प्रशासनिक रूप से विकसित नहीं हुआ था, तब सोहागपुर में कोर्ट-कचहरी संचालित होती थी। न्यायिक परंपरा और प्रशासनिक संरचना की शुरुआत यहां पहले हुई—यह तथ्य सोहागपुर की ऐतिहासिक केंद्रीयता को प्रमाणित करता है।
पौराणिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत…….
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सोहागपुर द्वापर युग में बाणासुर की राजधानी ‘शोणितपुर’ के रूप में प्रसिद्ध रहा है। क्षेत्र में प्राचीन मंदिर, हनुमान नाका क्षेत्र में प्राप्त प्राचीन मूर्तियां और महाशिवरात्रि का विशाल मेला इसकी सांस्कृतिक गहराई को दर्शाते हैं।
नाम की व्युत्पत्ति…….
‘सोहागपुर-शोभाग्यपुर-शोणितपुर’ से जुड़ी परंपराएं इसकी ऐतिहासिक निरंतरता को मजबूत करती हैं।
टाइगर स्टेट का मजबूत आधार…..
सोहागपुर के आसपास फैला सतपुड़ा अंचल प्रदेश का गौरव माना जाता है। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में आता है। मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, और इस अंचल में बाघों की उल्लेखनीय मौजूदगी प्रदेश की वन संपदा की पहचान है। पर्यटन, इको-टूरिज्म और जैव विविधता की दृष्टि से यह क्षेत्र राष्ट्रीय महत्व रखता है।
1965 से सशक्त तहसील, विशाल भौगोलिक विस्तार……..
ज्ञापन में यह तथ्य प्रमुखता से रखा गया कि 1965 में मध्यप्रदेश के गठन के समय से ही सोहागपुर एक विस्तृत और प्रभावी तहसील के रूप में स्थापित रहा है। 1980 से पहले तवा नदी से दूधी नदी तक फैला इसका क्षेत्र इसे जिले की सबसे बड़ी तहसील बनाता था और आज भी क्षेत्रफल एवं जनसंख्या के आधार पर यह अग्रणी है। चारों विधानसभाओं में सर्वाधिक मतदाता भी इसी क्षेत्र में हैं—जो प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की मांग को और मजबूत करता है।
कृषि, संरचना और विकास की संभावनाएं…….
गेहूं और दालों का प्रचुर उत्पादन, नर्मदा के निकट भौगोलिक स्थिति, ग्रामीण-शहरी संतुलन, शिक्षा-संस्थाएं और खेल गतिविधियों का विस्तार—ये सभी कारक किसी भी क्षेत्र को जिला बनाने के लिए आवश्यक आधार माने जाते हैं। ज्ञापन में कहा गया कि सोहागपुर इन सभी मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है।
“यह मांग किसी के विरोध में नहीं” — राकेश एक्का………
राकेश एक्का ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी अन्य क्षेत्र के विरोध में नहीं, बल्कि संतुलित और समग्र विकास के पक्ष में है। बड़े भौगोलिक क्षेत्र और अधिक जनसंख्या वाली तहसील को जिला बनाना प्रशासनिक सुगमता, त्वरित सेवा वितरण और स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम होगा।
ज्ञापन सौंपते समय उन्होंने कहा…….
“जिस नगर ने न्याय व्यवस्था की नींव पहले देखी, जो पौराणिक राजधानी रहा, जहां वन संपदा और कृषि दोनों की ताकत है, वह आज भी तहसील तक सीमित क्यों रहे? अब समय है कि सोहागपुर को उसका प्रशासनिक सम्मान मिले।”
अब निगाहें शासन-प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। इतिहास, जनसमर्थन और संसाधनों की मजबूती के साथ सोहागपुर की दावेदारी और भी प्रखर होती जा रही है।

