
पिपरिया / देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन के दौरान निकले भयंकर विष (हलाहल) को शिवजी ने पी लिया। सृष्टि को बचाने के लिए उन्होंने उस विष को अपने गले में रोक लिया जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। माता सती के त्याग के बाद शिवजी ने वैराग्य ले लिया था। पार्वती ने कठोर तपस्या से उन्हें प्रसन्न किया। उनके विवाह से गणेश और कार्तिकेय का जन्म हुआ जो गृहस्थ रूप को दर्शाता है। दक्ष का यज्ञ विनाश सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान होने पर आत्मदाह कर लिया था। क्रोधित शिव ने वीरभद्र को भेजकर दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। तपस्या में विघ्न डालने पर शिव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया, जो कामवासना पर नियंत्रण का प्रतीक है। राजा भगीरथ की तपस्या पर गंगा को धरती पर लाने के लिए शिव ने गंगा के प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में धारण किया। शिव के क्रोध से उत्पन्न असुर जालंधर ने आतंक मचाया। उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रत भंग होने पर शिव ने उसका वध किया। उक्त प्रेरक प्रसंग पंडित गोपाल कृष्ण तिवारी द्वारा गांधी वार्ड पाली रोड में चल रही साप्ताहिक शिव महापुराण कथा में आए भक्त जनों को अपने मुखार विंद से छठवें दिवस की कथा में रसपान कराए। पंडित गोपाल कृष्ण तिवारी ने कथा में बताया कि शिव की भक्ति का मतलब है खुद को पूरी तरह से ईश्वर को सौंप देना और सत्य का मार्ग अपनाना। वे महादेव हैं जो सृष्टि के कण-कण में रमे है । कथा श्रवण करने आई नगर पालिका अध्यक्ष नीना नवनीत नागपाल, क्षेत्रीय विधायक नागवंशी की धर्मपत्नी ममता नागवंशी एवं नगर पालिका के पार्षद ने शास्त्री महाराज का पुष्प माला पहनकर तथा व्यास गादी का पूजन कर महाराज श्री का आशीर्वाद लिया। चित्रकूट धाम कामद गिरी के पीठाधीश्वर दिवाकर महाराज ने कथा श्रवण करने आए श्रद्धालु भक्त जनों से रोज शिव मंदिर जाने का आह्वान करते हुए कहा कि वह प्रति दिन मंदिर जाये मंदिर जाने से जीवन में सकारात्मकता सुख शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है, कष्टों का निवारण होता है नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन को स्थिरता मिलती है। उन्होंने नारी शक्ति से दशरथ जैसे पुत्रों को जन्म देने का आह्वान किया। ज्ञात हो कि संगीतमय शिव महापुराण की सात दिवसीय कथा का आयोजन अर्धनारीश्वर मंदिर प्रांगण में नायक परिवार द्वारा कराया जा रहा है। इस संगीतमय महाशिवपुराण कथा में धर्म प्रेमी जन सेवा भाव से कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे हुए हैं।

