
नर्मदापुरम / आस्था और परंपरा का प्रतीक ‘संत शिरोमणि रामजी बाबा मेला’ आधिकारिक तौर पर तो संपन्न हो गया है, लेकिन मेला ग्राउंड की जमीन अब भी अवैध वसूली का चारागाह बनी हुई है। गुप्ता ग्राउंड में मेला समापन के हफ्तों बाद भी करीब 40 से 50 दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। आरोप है कि नगर पालिका के कुछ रसूखदार कर्मचारियों और अधिकारियों की शह पर नियमों को ताक पर रखकर यह बाजार सजाया जा रहा है।
बिना रसीद की ‘वीआईपी’ छूट ₹2000 प्रतिदिन का रेट?…..
नियमों के मुताबिक, मेला समाप्त होने के ठीक दो दिन के भीतर मैदान खाली कराना अनिवार्य है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। विशेष रूप से कंबलों का व्यापार करने वाले दुकानदारों ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि वे यहाँ रुकने के बदले नगर पालिका के दो कर्मचारियों को रोजाना ₹2000 की नकद राशि दे रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस वसूली की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि यह “सुविधा शुल्क” सीधा उन कर्मचारियों और पर्दे के पीछे बैठे अधिकारियों की जेब में जा रहा है, जो उन्हें मैदान से न हटाने की गारंटी देते हैं।
अंधेरे में कारोबार शाम 6 बजे तक का ‘शेड्यूल’……
प्रशासन ने मेले की बिजली तो काट दी है, लेकिन दुकानदारों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। कार्रवाई से बचने और बिजली की कमी को देखते हुए दुकानें सुबह 10 बजे खुलती हैं और सूरज ढलते ही शाम 6 बजे समेट ली जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया नगर पालिका प्रशासन की नाक के नीचे हो रही है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
बड़ा सवाल किसकी हो रही है ‘बंदरबांट’?……
नगर पालिका के ये ‘कलेक्टर’ कर्मचारी आखिर किसके संरक्षण में वसूली कर रहे हैं? जनता के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि वसूली की इस मोटी रकम में ऊपर तक किन-किन अधिकारियों की हिस्सेदारी है। क्या नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी इस भ्रष्टाचार से अनजान हैं या वे भी इस ‘मलाई’ में शामिल हैं? * अवैध संचालन नियम विरुद्ध 15-20 दिनों से जमी हैं दुकानें।* *खुली उगाही बिना रसीद के हजारों रुपये की अवैध वसूली का आरोप।* प्रशासनिक चुप्पी नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय संरक्षण दे रहे जिम्मेदार।
इस मामले में अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इन ‘भ्रष्ट’ कर्मचारियों पर नकेल कसता है या गुप्ता ग्राउंड पर नियमों की ऐसे ही धज्जियां उड़ती रहेंगी।

