




नर्मदापुरम / महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर संस्कारधानी नर्मदापुरम में भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि हर मार्ग ‘शिव पथ’ बन गया। भगवान काले महादेव जब अपनी भव्य शाही पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले, तो पूरी फिजा ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठी।
नारी शक्ति और जनसेवा का अनूठा संगम…..
इस वर्ष की शोभायात्रा में नारी शक्ति का अद्भुत रूप देखने को मिला। महिला श्रद्धालुओं ने न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि जनसेवा के संकल्प के साथ पूरी व्यवस्था को संभाला। जगह-जगह मातृशक्ति द्वारा पुष्प वर्षा कर महादेव का स्वागत किया गया, जो भक्ति के साथ-साथ सशक्त समाज का संदेश दे रहा था।
शाही ठाट-बाट: हाथी, घोड़े और किन्नर समाज की सहभागिता…….
शोभायात्रा का आकर्षण किसी राजसी वैभव से कम नहीं था।
* राजसी सवारी गजराज (हाथी) पर सवार महादेव के स्वरूप और ढोल-नगाड़ों की थाप ने वातावरण में उत्साह भर दिया।
* अश्वों का नृत्य यात्रा में विशेष रूप से शामिल घोड़ों ने अपनी टापों पर ऐसा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया कि श्रद्धालु देखते रह गए। घोड़ों के इस सधे हुए नृत्य ने पालकी यात्रा की भव्यता में चार चाँद लगा दिए।
* समावेशी आस्था इस शाही सवारी में किन्नर समाज की उपस्थिति विशेष रही। उन्होंने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और नृत्य के साथ महादेव की अगवानी की, जो हमारी संस्कृति की समावेशी भावना को दर्शाता है।
हजारों श्रद्धालुओं ने टेका मत्था…..
नगर के मुख्य मार्गों से गुजरी इस पालकी यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धा का आलम यह था कि लोग अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए घंटों छतों और सड़कों पर डटे रहे। प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा सुरक्षा एवं सेवा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। “महादेव की यह सवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नर्मदापुरम की एकता और अखंडता का प्रतीक बन गई, जहाँ समाज के हर वर्ग ने एक साथ मिलकर शिवत्व को नमन किया।”

